रिपोर्ट – अनिल कुमार

फतेहपुर। असोथर थाना क्षेत्र के सरकंडी बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में घोटाला ग्रामीण विकास और युवाओं के रोजगार सपनों पर सीधा प्रहार है। शाखा प्रबंधक पंकज गिरि एवं सेकेंड मैनेजर मुकुल सिंह ने सीएम युवा, PFME सहित अन्य सरकारी योजनाओं के तहत यूनिट स्थापित करने के नाम पर लाभार्थियों की फाइलें तो डलवाईं, लेकिन वास्तविक यूनिट लगवाने के बजाय दूसरी यूनिट दिखाकर लोन सेंशन कर दिया। इसके एवज में मोटी रकम वसूलने का आरोप।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह अनियमितता किसी एक-दो व्यक्ति तक सीमित नहीं रही, बल्कि दर्जनों लोगों के साथ इसी तरह का खेल किया गया। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को स्वावलंबी बनाना है, उन्हें व्यापार शुरू करने में मदद देना है, लेकिन बैंक कर्मचारियों के भ्रष्ट रवैये ने लाभार्थियों को आर्थिक और मानसिक दोनों स्तरों पर नुकसान पहुँचाया है।
शिकायतों के बाद बैंक मैनेजर के ट्रांसफर को कार्रवाई बताकर पेश किया गया, लेकिन यह केवल औपचारिकता है। लेकिन इससे उन लोनधारकों की पीड़ा कम नहीं होती जिन पर बिना यूनिट लगे ही कर्ज का बोझ डाल दिया गया। सरकार जहां व्यापार बढ़ाने और युवाओं को सब्सिडी देकर प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है, वहीं कुछ भ्रष्ट बैंककर्मी इन योजनाओं में पलीता लगाने का काम कर रहे हैं। जरूरत है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो, जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और जिन युवाओं और लाभार्थियों को फर्जी तरीके से लोन का बोझ थोप दिया गया है, उनके मामलों की पुनः समीक्षा कर उन्हें न्याय दिलाया जाए। सरकारी योजनाओं की सफलता तभी संभव है जब जमीनी स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो।
