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ईरान में सर्वोच्च धर्मगुरु की हत्या पर फूटा आक्रोश, काले लिबास में हजारों लोग सड़कों पर; शांतिपूर्ण जुलूस के बाद राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन

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रिपोर्ट – कबीर



मुज़फ़्फ़रनगर। ईरान में शिया समाज के सर्वोच्च धर्मगुरु सैय्यद अली खामनेई की हत्या की घटना को लेकर जनपद में गहरा शोक और उबाल देखने को मिला। रविवार को शहर में हजारों की संख्या में लोग काले कपड़े पहनकर सड़कों पर उतरे और शांतिपूर्ण सोगवार जुलूस निकालते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।


प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ईरान में हुई इस घटना ने पूरी उम्मत को झकझोर दिया है। किदवई नगर से शुरू हुआ जुलूस जेनबिया स्कूल, तबलसा रोड, राणा चौराहा और खालापार से होता हुआ फक्कड़ शाह चौक पर पहुंचा। पूरे रास्ते विरोध के नारे गूंजते रहे, हालांकि आयोजकों ने मंच से बार-बार अपील की कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

जुलूस में महिलाओं, बुजुर्गों, नौजवानों और मजहबी उलेमा की बड़ी भागीदारी रही। ईरान में पढ़ाई कर रहीं भारतीय छात्राओं के संदेश भी इस दौरान साझा किए गए। छात्राओं ने अपने संदेश में कहा कि ईरान में जिस तरह से हमला किया गया, उसने वहां रह रहे छात्रों और आम नागरिकों को भय और पीड़ा में डाल दिया है। उन्होंने अमेरिका और इज़राइल की कार्रवाई को बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि ऐसे कदमों से हालात और बिगड़ते हैं।
छात्राओं ने यह भी कहा कि किसी एक नेता की हत्या से विचारधारा समाप्त नहीं होती। उनके संदेश में भावनात्मक शब्दों में कहा गया कि “एक खामनेई के जाने से आवाज नहीं रुकेगी, हर घर से खामनेई निकलने का जज़्बा पैदा होगा।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि ईरान में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए प्रभावी पहल की जाए।
अली जैदी ने कहा, “ईरान में हमारे धर्मगुरु की हत्या ने हर दिल को ग़मगीन कर दिया है। हम यहां मुज़फ़्फ़रनगर में शांति के साथ अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं ताकि दुनिया तक इंसाफ की आवाज पहुंचे।”
उलेमा-ए-किराम ने अपने संबोधन में कहा कि जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है, लेकिन वह आवाज अमन और कानून के दायरे में रहकर ही उठाई जानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से संयम और एकता बनाए रखने की अपील की।
प्रदर्शन के उपरांत समाज के प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम प्रशासन संजय कुमार को महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि भारत सरकार ईरान में हुई इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाए और निर्दोषों की जान जाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाए।
शहर में जुलूस को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा और पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

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