आलू खरीद को केंद्र की मंजूरी से किसानों में उम्मीद, अब C2 फार्मूले पर टिकी निगाहें

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रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के किसानों से 20 लाख मीट्रिक टन आलू खरीद को बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) के तहत मंजूरी दिए जाने के बाद किसानों में नई उम्मीद जगी है। माना जा रहा है कि इस फैसले से प्रदेश के आलू बाजार में तेजी आएगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलने का रास्ता खुलेगा।
भारतीय किसान यूनियन सेवक के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनीत त्यागी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय से आलू उत्पादक किसान लागत और गिरते दामों की मार झेल रहे थे। ऐसे में सरकार का यह कदम राहत देने वाला है। उन्होंने कहा कि अगर खरीद प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध रही तो किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी केंद्रों पर गेहूं खरीद में फॉर्म रजिस्ट्री अनिवार्य न किए जाने के निर्णय का भी स्वागत किया। उनका कहना है कि इससे खरीद प्रक्रिया सरल होगी और छोटे किसानों को अनावश्यक कागजी झंझट से राहत मिलेगी।
हालांकि किसान नेताओं ने सरकार की MSP नीति पर भी सवाल उठाए हैं। विनीत त्यागी ने कहा कि केंद्र सरकार अभी MSP का मूल्यांकन A2+FL फार्मूले पर करती है, जबकि किसानों की मांग लंबे समय से C2 फार्मूले को लागू करने की रही है। उनका कहना है कि जब तक उत्पादन की वास्तविक लागत को जोड़कर लाभकारी मूल्य तय नहीं होगा, तब तक किसानों की आय दोगुनी करने का दावा अधूरा रहेगा।
उन्होंने कहा कि न्यायालय द्वारा इस मुद्दे पर संज्ञान लेना स्वागत योग्य है और सरकार को भी कथनी और करनी का अंतर समाप्त कर किसान हित में ईमानदारी से निर्णय लेने चाहिए। किसानों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सरकार लाभकारी MSP के सवाल पर कब ठोस कदम उठाती है।

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