रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। सन्त शिरोमणि रविदास जी की जयंती पर नगर पूरी तरह भक्ति, उल्लास और सामाजिक एकता के रंग में रंगा नजर आया। हर गली-चौराहे पर भजन-कीर्तन की गूंज, आकर्षक झांकियों की छटा और डीजे पर बजते भक्ति गीतों के बीच निकली भव्य शोभायात्रा ने माहौल को आध्यात्मिक उत्सव में बदल दिया। संत रविदास जी के अनुयायी हाथों में ध्वज-पताका लिए, भजनों पर झूमते-नाचते और उनके बताए समता, मानवता व प्रेम के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हुए शोभायात्रा में शामिल रहे।
टाउनहाल परिसर से शोभायात्रा का शुभारम्भ कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार और राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिलदेव अग्रवाल ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। इस अवसर पर समाज के गणमान्य लोगों द्वारा दोनों मंत्रियों का पटका पहनाकर भव्य स्वागत किया गया। मंच से संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि संत रविदास जी महाराज का जीवन हमें सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता और भाईचारे का रास्ता दिखाता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में संत रविदास जी के विचारों को आत्मसात करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने संत रविदास जी को 15वीं-16वीं शताब्दी के महान निर्गुण भक्ति संत, कवि और समाज-सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने जात-पात, ऊंच-नीच और छुआछूत जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। उन्होंने ईश्वर-प्रेम और मानव एकता का जो संदेश दिया, वह आज भी समाज को जोड़ने का कार्य कर रहा है। मंत्री ने लोगों से आह्वान किया कि संत रविदास जी के बताए मार्ग को अपनाकर एक समरस और सशक्त समाज का निर्माण करें।
शोभायात्रा में नगर के विभिन्न मोहल्लों और क्षेत्रों से आई भव्य झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। टाउनहाल प्रांगण में एकत्रित होने के बाद शोभायात्रा झांसी की रानी, शिवचौक, रुड़की रोड, नॉवेल्टी चौराहा, बकरा मार्केट रोड, नंबर दो चुंगी, आबकारी रोड, हनुमान चौक, भगत सिंह रोड होते हुए पुनः शिवचौक पर सम्पन्न हुई। पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया, वहीं जगह-जगह जलपान की व्यवस्था भी की गई।
कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क नजर आया। पुलिस बल की तैनाती के बीच शोभायात्रा शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से सम्पन्न हुई। आयोजन में सभी वर्गों और समाजों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि संत रविदास जी के विचार आज भी समाज को जोड़ने की ताकत रखते हैं।
कुल मिलाकर संत रविदास जयंती का यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, समानता और मानवता के संदेश का सशक्त प्रदर्शन बनकर उभरा, जिसने मुजफ्फरनगर को भक्ति और भाईचारे के सूत्र में पिरो दिया।
