रिपोर्ट – प्रदीप श्रीवास्तव
बहराइच। “एक अरदास भाट कीरत की,गुरु रामदास राखहु सरणाई” जैसे शबद से गुरुद्वारा परिसर अमृतमय हुआ,नगर स्थित गुरद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में सिख धर्म के चौथे गुरु श्री गुरु रामदास जी का गुरु पर्व बड़े प्यार व श्रद्धा से मनाया गया इस अवसर पर नगर की साध संगत ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को माथा टेका,हेड ग्रंथी ज्ञानी विक्रम सिंह ने बताया सिख धर्म के चौथे गुरु श्री गुरु रामदास जी ने अमृतसर स्थापना की अमृतसर का पूर्व नाम रामसर था, गुरु रामदास जी का जीवन भक्ति और सेवा को समर्पित रहा। गुरू रामदास साहिब जी ने सिख धर्म को आनन्द कारज’ के लिए चार लावों’ (फेरों) की रचना की और सरल विवाह की गुरमत मर्यादा को समाज के सामने रखा। गुरुपर्व में पंजाब के जगाधरी से आए रागी जत्था भाई सुवेग सिंह जी एवं हजूरी रागी भाई फतेह सिंह जी ने साध संगत को शब्द कीर्तन से निहाल किया। शब्द कीर्तन के बाद हेड ग्रंथी ज्ञानी विक्रम सिंह ने सरबत के भले की अरदास की तत्पश्चात गुरु का अटूट लंगर चला।
इस अवसर पर मनजीत सिंह शम्पी, मनदीप सिंह वालिया, परमजीत सिंह, संतोष सिंह तोषी,भूपेंद्र सिंह, गुरमीत सिंह, सुरेंद्र सिंह, जोरावर सिंह, सुरजीत सिंह, गुरदेव सिंह, बलजीत कौर, जसप्रीत कौर, हरप्रीत कौर,मंजीत कौर,गुरबख्श कौर,प्रदीप श्रीवास्तव, रवि श्रीवास्तव, राजजोग सिंह,गुरजीत कौर, परविंदर सिंह सम्मी समेत सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
