रिपोर्ट – हरीश


हमीरपुर। देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में सुमेरपुर कस्बे में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने क्रांतिकारी आन्दोलन के सूरमा चन्द्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि आजाद सही मायने में मातृभूमि के निडर सपूत थे। इनके वंशज उन्नाव के बदरका के रहने वाले थे, जो बाद में मध्य प्रदेश के भावरा चले गए थे। आजाद का जन्म भावरा में ही 23 जुलाई 1906 को सीताराम तिवारी तथा जगरानी के घर हुआ था। ये प्रारम्भ से ही देशसेवी सोच के थे। संगठन और रणनीति के मामले में इनका कोई सानी नहीं था। हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र संघ नामक संगठन में इनकी प्रमुख भूमिका थी। इनका दृढ़ निश्चय था कि आजाद हैं, आजाद ही रहेंगे। उस समय ये युवा देशभक्तों के रोल माडल बन चुके थे। 1925 के काकोरी ट्रेन केस में भी इनका निर्देशन प्रमुख था। आगे चलकर इनके साथ भितरघात हुआ और 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के एल्फ्रेड पार्क में इनके परिचित ने इनके वहां मौजूद होने की सूचना गोरों को दे दी। गोरों से अकेले मुकाबला करते हुये इनके पास जब केवल एक गोली बची, तो उसी से अपने ऊपर फायर कर 27 फरवरी 1931 को ये शहीद हो गए। इस कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, सिद्धा, प्रेम, सागर, प्रिन्स, रिचा, महावीर प्रजापति, रामनारायन सोनकर, विकास, रामबाबू, सतेन्द्र, राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।
