रिपोर्ट – एकरार खान

गाजीपुर। सदर तहसील में जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले आम लोगों के लिए यह प्रक्रिया अब परेशानी और डर का कारण बनती जा रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रजिस्ट्री कराने से पहले कथित तौर पर रजिस्ट्रार कार्यालय से जुड़े लोगों को 2 से 3 प्रतिशत तक कमीशन देना अनिवार्य कर दिया गया है। कमीशन दिए बिना रजिस्ट्री कराना लगभग असंभव बताया जा रहा है।
सूत्रों का दावा है कि यदि कोई व्यक्ति इस अवैध मांग का विरोध करता है या कमीशन देने से इनकार करता है, तो उसके साथ “बड़ा खेल” हो सकता है। कभी दस्तावेजों में जानबूझकर कमी निकाल दी जाती है, तो कभी फाइल को महीनों तक लटकाया जाता है। कई मामलों में रजिस्ट्री की तारीख आगे बढ़ा दी जाती है, जिससे खरीदार और विक्रेता दोनों मानसिक दबाव में आ जाते हैं।
सुत्र ने यह भी दावा किया है कि सरकारी नियमों के अनुसार रजिस्ट्री प्रक्रिया पारदर्शी और तय शुल्क पर होनी चाहिए, लेकिन सदर तहसील में हालात इसके ठीक उलट नजर आ रहे हैं। आम आदमी मजबूरी में रिश्वत देने को विवश है, क्योंकि जमीन से जुड़ा मामला होने के कारण देरी उसे भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी इस अवैध वसूली से अनजान कैसे हैं? या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठे हैं। यदि समय रहते इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह भ्रष्टाचार और गहराई तक जड़ जमा सकता है।
जनता ने जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि रजिस्ट्री कार्यालय में हो रही कथित कमीशनखोरी की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि आम नागरिक बिना भय और दबाव के अपनी जमीन की रजिस्ट्री करा सके।
