उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन के लिए धरातल पर उतरा सिंचाई विभाग
रिपोर्ट – हरीश


भरुआ सुमेरपुर। आखिरकार सिंचाई विभाग उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराने के लिए अब धरातल पर आकर कार्यवाही पूर्ण करने में जुट गया है। मंगलवार को सिंचाई विभाग महोबा के सहायक अभियंता के नेतृत्व में आई टीम ने चिन्हित किए गए 95 लोगों को नोटिस तामील कराकर 15 दिवस में बंधी की जमीन खाली करने का अल्टीमेटम दिया है। सिंचाई विभाग के इस कदम से बंधी की जमीन पर आलीशान कार्यालय, व्यापारिक प्रतिष्ठान, आवास बनाने वालों में हड़कंप मच गया है। सिंचाई विभाग की इस नोटिस में स्पष्ट किया गया कि यह अंतिम नोटिस है। इसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्यवाही होना तय है।
वर्ष 2021 में उच्च न्यायालय इलाहाबाद में एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सिंचाई विभाग की रिपोर्ट को आधार बनाकर बंधी को ध्वस्त करके बनाये गये मकान को ढहाने का आदेश पारित किया था। इस आदेश के अनुपालन के लिए जिला प्रशासन ने हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके 6 माह का समय मांगा था। कोर्ट ने इस हलफनामे को स्वीकार करके 6 माह की अवधि ढहाने को दी थी। बाद में प्रशासन इस आदेश को अलमारी में बंद करके भूल गया था। गत 15 जनवरी को कस्बे में हुए लव जेहाद, गैंगरेप, धर्मांतरण की घटना के बाद इस आदेश के तहत इंडियन लाज को ढहाने का मामला गर्म हुआ था। इसके बाद प्रशासन नींद से जागा और सिंचाई विभाग को सक्रिय करके रिपोर्ट तलब की। सिंचाई विभाग से प्रशासन ने कार्यवाही को आगे बढ़ाने के आदेश दिए थे। मंगलवार को सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता लवी गुप्ता के नेतृत्व में डीआरओ कृष्ण कुमार, कुलदीप कुमार अवर अभियंता, उमेश कुमार जिलेदार, रामस्वरूप अमीन आदि कर्मियों के साथ कस्बे में आए और बस स्टॉप से लेकर रेलवे स्टेशन तक बंधी ध्वस्त करके मकान बनाने वाले 95 लोगों को नोटिस थमाकर 15 दिवस में खाली करने का कहा गया है। सहायक अभियंता ने बताया कि 15 दिन के बाद बंधी की जमीन पर बने भवनों को ढहाने की कार्यवाही शुरू की जाएगी। यह अंतिम नोटिस है। विभाग इसके पूर्व दो बार नोटिस दे चुका है लेकिन किसी ने बंधी की जमीन खाली नहीं की है।
