रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ्फरनगर। मुज़फ्फरनगर जनपद की तहसील जानसठ में वर्षों से चले आ रहे एक विवाद का आज निर्णायक अंत हो गया। उपजिलाधिकारी जानसठ राजकुमार भारती के निर्देश पर पुलिस व प्रशासन की संयुक्त टीम ने ग्राम कम्हेडा में स्थित तालाब की भूमि से 33 साल पुराना अवैध कब्जा हटवाकर सरकारी जमीन को मुक्त करा लिया। यह कार्रवाई पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से की गई, जिससे ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली।
जानकारी के अनुसार ग्राम कम्हेडा में स्थित तालाब की भूमि पर वर्ष 1992 में जुल्फिकार पुत्र अशरफ को हरियाली पट्टे के अंतर्गत आवंटन किया गया था। हालांकि समय के साथ यह मामला विवादों में घिर गया और वर्ष 2022 में संबंधित पट्टा न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया। इसके बाद कब्जाधारी ने सिविल कोर्ट से लेकर कमिश्नरी सहारनपुर तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन हर स्तर पर पट्टा निरस्त ही रहा। अंततः माननीय न्यायालयों के आदेश और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के क्रम में यह तय हो गया कि तालाब जैसी सार्वजनिक जल संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का कब्जा नहीं हो सकता।
इसी क्रम में आज तहसीलदार श्रद्धा गुप्ता, नायब तहसीलदार बृजेश कुमार, कानूनगो, लेखपाल सहित पुलिस बल की मौजूदगी में मौके पर पहुंचकर संयुक्त टीम ने तालाब की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया। कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार का विरोध नहीं हुआ और प्रशासन ने पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्यवाही को अंजाम दिया।
तहसीलदार श्रद्धा गुप्ता ने बताया कि तालाब की भूमि पर किया गया कब्जा पूरी तरह अवैध था। उपजिलाधिकारी राजकुमार भारती द्वारा गठित टीम को स्पष्ट निर्देश थे कि न्यायालय के आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाए। उसी के तहत ग्राम कम्हेडा में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर तालाब की जमीन को कब्ज़ामुक्त करा दिया है।
प्रशासन की इस कार्रवाई से न सिर्फ वर्षों पुराना विवाद समाप्त हुआ है, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक सख्त संदेश भी गया है कि तालाब, पोखर और अन्य सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
