छिन गया था सिर से साया, छलक उठीं आंखें जब डीएम ने बढ़ाया मदद का हाथ
रिपोर्ट – शारिक खान

रामपुर। कलेक्ट्रेट सभागार का नजारा उस वक्त बेहद भावुक हो गया, जब जिंदगी की दुश्वारियों और अपनों को खोने के गम से टूटे कुछ परिवार अपनी आखिरी आस लेकर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के सामने पहुंचे। किसी के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका था, तो कोई असाध्य बीमारी से जूझते हुए अपने मासूम बच्चों के भविष्य को लेकर डरा हुआ था। ऐसे 10 बेसहारा और जरूरतमंद बच्चों के लिए जिलाधिकारी एक अभिभावक की तरह आगे आए और उन्हें सरकारी योजनाओं का संबल देकर उनके मुरझाए चेहरों पर फिर से मुस्कान लौटा दी।
दर्द और बेबसी की वो कहानियां…
जब ग्राम पनवड़िया के सुखवासी सिंह अपने बेटे मयंक को लेकर डीएम के सामने पहुंचे, तो उनकी आंखों में बच्चे के भविष्य की चिंता साफ झलक रही थी। ग्राम रजपुरा मिलक से आए भगवान दास अपने बेटे आयुष के साथ खड़े थे, वहीं सब्बू अपनी मासूम तब्बानूर को लेकर पहुंचे थे। इन परिवारों में रोजी-रोटी का इंतजाम करने वाला कोई नहीं बचा है। माहौल तब और गमगीन हो गया जब देवेन्द्र कौर अपने दो बेटोंकृ लवप्रीत और भीमसेन को लेकर आईं। पति के असामयिक निधन के बाद इस अकेली मां के लिए अपने बच्चों की परवरिश करना एक पहाड़ जैसी चुनौती बन गया था। इन हालात को सुनकर जिलाधिकारी ने तुरंत जिला प्रोबेशन अधिकारी को इन बच्चों की मदद करने के निर्देश दिए।
बीमार मां की पीड़ा को मिला योजनाओं का मरहम
श्रीमती लता जब अपनी फरियाद लेकर पहुंचीं, तो उनकी हालत देख वहां मौजूद लोगों का दिल पसीज गया। पति इस दुनिया में नहीं रहे और वह खुद अक्सर बीमार रहती हैं। ऐसे में मासूम डिग्गू और काव्या का भविष्य अंधकार में डूबता नजर आ रहा था। जिलाधिकारी ने तुरंत संवेदनशीलता दिखाते हुए लता जी को श्विधवा पेंशन योजनाश् से जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही उनके दोनों बच्चों को श्मुख्यमंत्री बाल सेवा योजनाश् का सहारा दिया गया, ताकि बीमारी और गरीबी उनके बच्चों का बचपन न छीन सके।
आर्थिक संबल – जब सरकार बनी अभिभावक अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन मासूम चेहरों पर उम्मीद की नई रोशनी बिखेरीरू
’ स्पॉन्सरशिप योजना की संजीवनीरू 06 मासूम बच्चों को केंद्र सरकार की इस योजना से जोड़ा गया। अब इन बच्चों के खातों में शिक्षा और पालन-पोषण के लिए हर महीने 4000 रुपये की सहायता राशि पहुंचेगी।
’ मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का सहारारू बिचौला मिलक के अनम बी और मौनिस रजा समेत अन्य बच्चों को इस योजना से आच्छादित किया गया। इन बच्चों को अपना जीवन संवारने के लिए हर महीने 2500 रुपये की मदद दी जाएगी।
छू गया वह पल, जब डीएम ने खुद दिए बस्ते और किताबें
कागजी कार्रवाइयों और आदेशों से परे, एक बेहद मार्मिक पल तब आया जब जिलाधिकारी ने इन उदास बच्चों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें स्कूल जाने के लिए अपने हाथों से बस्ते, कॉपी और किताबें दीं। अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई कि इन बेसहारा बच्चों को समय पर योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। खाली हाथ और नम आंखों से आए ये परिवार जब कलेक्ट्रेट से लौटे, तो उनके चेहरों पर एक नई सुबह की उम्मीद थी

