AIMIM के शक्ति प्रदर्शन से बदला सियासी संतुलन सपा से जुड़े कई नेताओं की मौजूदगी, जिले की राजनीति में बड़ा झटका

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रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। जिले की सियासत में रविवार को उस वक्त बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के शक्ति प्रदर्शन ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी। लंबे समय से समाजवादी पार्टी की राजनीति से जुड़े रहे कई नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं द्वारा AIMIM का दामन थामे जाने को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों से पहले सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह घटनाक्रम जिले में समाजवादी पार्टी की पकड़ कमजोर होने और नए राजनीतिक समीकरण बनने की ओर इशारा करता है।
आपको बता दे खालापार क्षेत्र में कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जुटी भीड़ और लगातार हो रही सदस्यता ग्रहण की प्रक्रिया ने यह साफ कर दिया कि AIMIM अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खुद को एक प्रभावी राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मंच से दिए गए भाषणों और नारों में भी पुराने राजनीतिक दलों के प्रति नाराजगी और नए विकल्प की तलाश साफ नजर आई।

AIMIM के पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मेहताब चौहान ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी पर सीधा और तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन दलों ने दशकों तक मुसलमानों को केवल वोट बैंक समझा, आज वही दल अपना जनाधार खोते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय बड़ी-बड़ी बातें करने वाली पार्टियों ने सत्ता में आने के बाद मुस्लिम समाज की समस्याओं को कभी गंभीरता से नहीं लिया।
मेहताब चौहान ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दंगा भी समाजवादी पार्टी की नीतिगत विफलताओं का नतीजा था। उन्होंने कहा कि उस दौर में दंगा पीड़ित परिवार टेंटों में रहने को मजबूर थे, कड़ाके की सर्दी में खुले आसमान के नीचे रातें काट रहे थे, लेकिन सत्ता में बैठे लोग जमीनी हकीकत से कटे हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पीड़ित परिवार राहत और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे थे, उसी समय प्रदेश का नेतृत्व संवेदनशीलता दिखाने में पूरी तरह विफल रहा।
उन्होंने आगे कहा कि आज भी मुसलमानों के साथ न्याय, सुरक्षा और सम्मान का सवाल जस का तस बना हुआ है। आजम खान जैसे वरिष्ठ नेता आज जेलों में हैं, लेकिन खुद को सेकुलर बताने वाली पार्टियां खुलकर उनके साथ खड़ी नहीं हो पा रही हैं। मेहताब चौहान ने कहा कि AIMIM अब समझौते की नहीं, अधिकारों की राजनीति करेगी और किसी भी कीमत पर अपने समाज की आवाज को दबने नहीं देगी।
उन्होंने यह भी कहा कि AIMIM अब किसी दल की बैसाखी बनकर राजनीति नहीं करेगी। पार्टी अपने बलबूते पर चुनाव मैदान में उतरेगी और जनता के बीच जाकर अपने एजेंडे के साथ समर्थन मांगेगी। महाराष्ट्र और बिहार में AIMIM की सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब समाज एकजुट होता है, तो राजनीतिक ताकत बनने से कोई नहीं रोक सकता।
कार्यक्रम के दौरान जिले की राजनीति में उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ के बीच लगातार सदस्यता ग्रहण कराई गई।
पूर्व सभासद राजा मेंबर सैकड़ों कार्यकर्ता तथा समाजवादी पार्टी के मजदूर संगठन के जिला अध्यक्ष उमर खान सहित अन्य सदस्यों के AIMIM में शामिल होने से यह साफ संकेत मिला कि समाजवादी पार्टी के भीतर भी असंतोष गहराता जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम के बाद जिले की राजनीति में समीकरण बदल सकते हैं। AIMIM का यह शक्ति प्रदर्शन न केवल सपा के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अब मुस्लिम राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, जहां पुरानी सियासत को खुली चुनौती मिल रही है।

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