रिपोर्ट – विजय प्रताप गुप्ता
बहराइच। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी पवन कुमार शर्मा-द्वितीय की अदालत ने शनिवार को 32 साल पुराने तिहरे हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया है। सत्र परीक्षण के दौरान अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन के अनुसार 31 जुलाई 1994 को सुबह करीब सात बजे थाना कोतवाली नानपारा क्षेत्र के ग्राम चौवाइनपुरवा, दा० ईंटहा में वादिनी सुमित्रा के पति चिरकू , व बेटा संतराम और दामाद मायाराम की लाठी-डंडा, गड़ांसा, बांका व बल्लम से हमला कर हत्या कर दी गई थी। वादिनी ने तहरीर में बताया था कि थाना रुपईडीहा क्षेत्र में उसके लड़के महजम उर्फ महतो के साथ श्यामलाल, रामफल, विजई आदि ने डकैती डाली थी। घटना के बाद लड़के द्वारा पुलिस को सही पता बताने की रंजिश में आरोपियों ने घटना को अंजाम दिया है।वादिनी की तहरीर पर थाना कोतवाली नानपारा में आरोपियों के खिलाफ हत्या समय विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना रिपोर्ट अदालत में सौंप गई थी।
इनकी हो चुकी है मौत
विचारण के दौरान चार आरोपी श्यामलाल, रामफल, गोपी व ढोंढे की मृत्यु हो चुकी है। वहीं जीवित पांच आरोपी गिरधारी, महावीर, विजई उर्फ विजय राम, गरीबे व राधेश्याम के विरुद्ध मुकदमा चला।
गवाह और विवेचक की बड़ी भूमिका
अदालत ने वादिनी सुमित्रा, गवाह गोघे, चिकित्सक साक्षी डॉ. जेएन मिश्रा व विवेचक की गवाही और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर माना कि मृतकों की मौत 31 जुलाई 1994 को लाठी, गड़ांसा व बांका से आई चोटों के कारण हुई। शनिवार को अदालत ने मुकदमें में
इनको यह हुई सजा
दोषसिद्ध अभियुक्त गिरधारी, महावीर, विजई उर्फ विजय राम, गरीबे व राधेश्याम को अदालत ने सभी आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास 1,15,000-1,15,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर सभी छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा
