फास्टैग को दरकिनार कर नकद वसूली का आरोप,
ओवरलोड वाहनों की पर्चियां ओबीसी श्रेणी में काटने पर उठे सवाल!
रिपोर्ट – एकरार खान
गाजीपुर। बिरनो टोल प्लाजा पर टोल वसूली की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में फास्टैग के जरिए भुगतान कराने के बजाय नकद धनराशि ली जाती है। वहीं, ओवरलोड वाहनों की निर्धारित श्रेणी के बजाय कथित तौर पर ओबीसी श्रेणी में पर्चियां काटे जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो टोल वसूली की पारदर्शिता और नियमों के अनुपालन को लेकर जवाबदेही तय करना जरूरी होगा।
फास्टैग व्यवस्था के बीच नकद वसूली क्यों?
टोल प्लाजा पर डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू होने के बावजूद कथित नकद वसूली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर किन परिस्थितियों में नकद भुगतान लिया जा रहा है? क्या प्रत्येक लेन-देन का नियमानुसार रिकॉर्ड रखा जा रहा है? इन सवालों का जवाब संबंधित टोल प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।
ओवरलोड वाहनों की पर्चियों पर भी संदेह
मामले का दूसरा पहलू ओवरलोड वाहनों से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ वाहनों की पर्चियां ओवरलोड श्रेणी के बजाय ओबीसी श्रेणी में काटी जा रही हैं। यदि ऐसा हुआ है, तो यह जांच का विषय है कि वाहन की वास्तविक श्रेणी क्या थी, किस आधार पर पर्ची जारी की गई और निर्धारित शुल्क के अनुसार वसूली हुई या नहीं।
सीसीटीवी से लेकर लेन-देन के रिकॉर्ड तक हो जांच
पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज, फास्टैग लेन-देन का विवरण, नकद वसूली के रिकॉर्ड, वाहन श्रेणी और जारी पर्चियों का मिलान कराया जाना चाहिए। जांच में अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई भी होनी चाहिए।
जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर नजर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग इन आरोपों को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या टोल प्लाजा पर निर्धारित नियमों के अनुसार ही शुल्क वसूला जा रहा है? और यदि पर्चियों में गड़बड़ी सामने आती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। टोल प्रबंधन का पक्ष और संबंधित विभाग की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट होगी। सार्वजनिक राजस्व और टोल वसूली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
