रिपोर्ट – कबीर
मुजफ्फरनगर। धान खरीद के लिए फार्मर आईडी और एग्रीस्टैक की अनिवार्यता से परेशान किसानों को उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले से राहत मिली है। अब फार्मर आईडी के आंकड़ों से संतुष्ट किसान उसके आधार पर पंजीकरण करा सकेंगे, जबकि असंतुष्ट किसानों को पिछले वर्ष की तरह पंजीकरण कराने की सुविधा मिलेगी। शासन के इस फैसले को भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने किसानों की मांग पर मिली राहत बताया है।
संगठन ने 29 अक्टूबर को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर एग्रीस्टैक और डिजिटल क्रॉप सर्वे में आ रही तकनीकी खामियों का मुद्दा उठाया था। संगठन का कहना था कि गलत फसल दर्ज होने और गाटा संख्या में गड़बड़ी जैसी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में किसान धान खरीद के लिए पंजीकरण नहीं करा पा रहे हैं। इसके बाद मंडल स्तर पर आयोजित प्रदर्शन में भी इस मांग को प्रमुखता से उठाया गया था।
संगठन की मांग पर शासन के खाद्य एवं रसद अनुभाग-4 ने चार नवंबर को शासनादेश संख्या 666/29-4-2026/ई-163/2026 जारी कर धान क्रय नीति में संशोधन किया। इसमें स्पष्ट किया गया कि जिन किसानों की फार्मर आईडी बनी है और वे उसके विवरण से संतुष्ट हैं, वे उसके आधार पर पंजीकरण करा सकते हैं। वहीं, विवरण से संतुष्ट नहीं होने वाले किसानों को पिछले वर्ष की तरह पंजीकरण प्रक्रिया अपनाने की छूट दी गई है।
भाकियू अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद पत्र भेजकर प्रदेश सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि तकनीकी खामियों का खामियाजा किसानों को नहीं भुगतना चाहिए। सरकार के फैसले से किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान बेचने के लिए पंजीकरण कराने में सहूलियत मिलेगी। संगठन ने इसे किसानों की समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया।
