रिपोर्ट – कबीर
मुजफ्फरनगर। गन्ने का लाभकारी मूल्य 700 रुपये प्रति कुंतल घोषित करने और चीनी मिलों पर बकाया भुगतान का ब्याज दिलाने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन वर्मा ने प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। महावीर चौक स्थित जिला कार्यालय पर आयोजित किसान बैठक में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने गन्ने का भाव 700 रुपये कुंतल घोषित नहीं किया तो 2027 के विधानसभा चुनाव में किसान भाजपा को वोट नहीं देंगे।
भगत सिंह वर्मा ने कहा कि वर्ष 2017 से भाजपा की प्रदेश सरकार लगातार गन्ना किसानों की अनदेखी कर रही है। चीनी मिल मालिकों को लाभ पहुंचाया जा रहा है, जबकि किसान बढ़ती लागत और कर्ज के बोझ से परेशान हैं। उन्होंने मांग की कि प्रदेश की 121 चीनी मिलों पर पिछले वर्षों के विलंबित गन्ना भुगतान का करीब 19 हजार करोड़ रुपये ब्याज बकाया है, जिसे तत्काल किसानों को दिलाया जाए।
उन्होंने कहा कि खाद, बीज, कीटनाशक, कृषि यंत्र और मजदूरी महंगी होने से गन्ने की उत्पादन लागत 550 रुपये प्रति कुंतल से अधिक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद किसानों को लागत के अनुरूप मूल्य नहीं मिल रहा। सरकार किसानों को 700 रुपये कुंतल लाभकारी मूल्य देने के बजाय उनकी लागत भी नहीं निकाल पा रही है।
वर्मा ने दावा किया कि प्रदेश सरकार को गन्ना किसानों की बदौलत वर्ष 2025-26 में 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिला है। इसमें से 10 हजार करोड़ रुपये सीधे गन्ना किसानों के खातों में दिए जाने चाहिए। उन्होंने पंजाब सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां गन्ना किसानों को 67.50 रुपये प्रति कुंतल अतिरिक्त भुगतान किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार भी किसानों को राहत दे सकती है, लेकिन इच्छाशक्ति की कमी के कारण ऐसा नहीं किया जा रहा।
उन्होंने चौधरी चरण सिंह के मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 1967 में गन्ने का मूल्य 12.10 रुपये से बढ़ाकर 17.10 रुपये प्रति कुंतल किया गया था। उस समय शिक्षक का मासिक वेतन और सोने के दाम की तुलना में आज गन्ने के मूल्य में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। यही वजह है कि किसानों पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है।
भगत सिंह वर्मा ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग गन्ने की उत्पादन लागत 173 रुपये प्रति कुंतल बता रहा है, जबकि वास्तविक लागत 550 रुपये से अधिक है। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमएस स्वामीनाथन ने किसानों की सभी लागतों को जोड़कर 50 प्रतिशत लाभ देने के आधार पर फसलों का मूल्य तय करने की सिफारिश की थी। सरकार को इस सिद्धांत के अनुसार किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों को उनका हक दिलाने के लिए पंचायतों और जनजागरण अभियान के जरिए आंदोलन की शुरुआत कर दी गई है। मांग पूरी नहीं होने पर प्रदेशभर के किसान सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष राकेश कुमार ने की, जबकि संचालन प्रदेश प्रवक्ता रोहित गौतम ने किया। बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. मुर्तजा सलमानी, प्रदेश उपाध्यक्ष मोहम्मद मुखिया त्यागी, प्रदेश सचिव डॉ. परविंदर मलिक, वसीम जहीरपुर, महबूब हसन, सुरेंद्र सिंह एडवोकेट, विकास राणा, प्रदीप राणा, प्रमोद खलीफा, हाजी सुलेमान, हाजी जोगिंदर सिंह, चौधरी कालू सिंह सहित अन्य किसान पदाधिकारी मौजूद रहे।
