रिपोर्ट ब्यूरो संजीव कुमार सक्सेना


फर्रुखाबाद/जनपद में तंबाकू, गुटखा और सिगरेट की खुलेआम कालाबाजारी का मामला तेजी से चर्चा का विषय बनता जा रहा है।खुदरा मूल्य से डेढ़ से दो गुना अधिक कीमत पर इन उत्पादो की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है।जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी अनियमितता की जानकारी होने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं नजर आ रही है शहर और कस्बों की अधिकांश पान दुकानो एवं थोक बाजारों में निर्धारित एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) की खुलेआम अनदेखी की जा रही है दुकानदारों का कहना है कि बड़े व्यापारियों द्वारा ही ऊंचे दामों पर माल दिया जा रहा है।जिसके कारण उन्हें मजबूरी में महंगे दामों पर बिक्री करनी पड़ रही है वहीं उपभोक्ताओं का आरोप है कि कृत्रिम कमी दिखाकर जान बूझकर कीमते बढ़ाई जा रही है।सूत्रों के अनुसार कुछ बड़े व्यापारी स्टाक जमा करके बाजार में सप्लाई सीमित कर देते हैं।जिससे मांग बढ़ने पर मनमाने दाम बसूले जा सके यह स्थिति त्यौहारों और विशेष अवसरो पर और अधिक गंभीर हो जाती है कई जगहों पर एमआरपी से 150 से 200 रुपये तक अधिक वसूली की शिकायते सामने आई है।स्थानीय नागरिकों का कहना है प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार शिकायत देने के बावजूद जांच केवल कागजों तक सीमित रह जाती है छापेमारी व दंडात्मक कार्रवाई न होने से कालाबाजारी करने वालों के हौसले बुलंद हैं।लोगों ने सबाल उठाया है कि जब नियम स्पष्ट है तो बाजार में खुलेआम उल्लंघन क्यों हो रहा है।विशेषज्ञो का मानना है कि तम्बाकू उत्पाद पर अवैध मुनाफाखोरी सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से चिंता का विषय है यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए,तो यह अवैध कारोबार और अधिक फैल सकता है अब देखना यह होगा कि प्रसाशन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और आम जनता को राहत दिलाने के लिए कब तक प्रभावी कार्रवाई करता है।
