रिपोर्ट – एकरार खान

गाजीपुर। जखनियां ब्लॉक प्रमुख चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ चुका है, लेकिन इस बार चर्चा का केंद्र बने हैं एक ही नाम—सत्येन्द्र सिंह उर्फ मसाला सिंह। अपने बेबाक अंदाज और साफ-साफ बात रखने के लिए पहचाने जाने वाले मसाला सिंह ने एक पॉडकास्ट में ऐसा बयान दे दिया है, जिसने पूरे इलाके की राजनीति में हलचल मचा दी है।
सीट पर सस्पेंस, लेकिन रणनीति साफ
मसाला सिंह ने दो टूक कहा—“अगर सीट सामान्य हुई, तो मैं खुद मैदान में उतरूंगा… और अगर पिछड़ा वर्ग हुई, तो अनिल यादव को खुला समर्थन रहेगा।”
यानी चुनाव चाहे जैसे भी घूमें, “मसाला” हर हाल में राजनीति के केंद्र में रहने वाला है।
मेरी लड़ाई किसी से नहीं सिर्फ विकास से है
अपने विरोधियों को सीधे-सीधे चुनौती देने के बजाय मसाला सिंह ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। बोले—
“मैं किसी प्रत्याशी के खिलाफ नहीं, मैं विकास के पक्ष में हूं। जनता ने जब-जब भरोसा किया, मैंने जखनियां में काम करके दिखाया।”
इस बयान को लोग “सॉफ्ट अटैक” भी मान रहे हैं—बिना नाम लिए विरोधियों पर सवाल भी और अपनी छवि भी मजबूत!
चुनाव से पहले ही बढ़ी हलचल
मसाला सिंह के इस बयान के बाद जखनियां की गलियों से लेकर चाय की दुकानों तक सिर्फ एक ही चर्चा—अगर मसाला सिंह खुद लड़े तो मुकाबला किससे?”
अगर समर्थन दिया तो समीकरण किसके पक्ष में?”
राजनीतिक पंडितों की मानें तो उनका यह स्टैंड सीधे-सीधे चुनावी गणित को पलट सकता है।
समर्थकों में जोश, विरोधियों में खलबली
उनके समर्थक इसे “मास्टर स्ट्रोक” बता रहे हैं, तो विरोधी खेमे में बेचैनी साफ दिख रही है।
कहा जा रहा है कि मसाला सिंह का ग्राउंड कनेक्शन और विकास की छवि उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।
अब नजर आरक्षण पर
पूरा खेल अब एक फैसले पर टिका है—सीट का आरक्षण क्या होगा?
लेकिन इतना तय है कि
मसाला सिंह मैदान में हों या बैकफुट से खेलें, चुनाव का असली “मसाला” वही हैं!

