रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ़्फ़रनगर। न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा देने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू कराने और किसानों की कर्ज़ मुक्ति की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) ने देशव्यापी किसान आंदोलन का ऐलान कर दिया है। कन्याकुमारी से लेकर श्रीनगर, कश्मीर तक प्रस्तावित यह किसान यात्रा 7 फरवरी 2026 से शुरू होकर 19 मार्च को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में समाप्त होगी, जहां प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
दिल्ली के गुरुद्वारा श्रीरकाबगंज साहिब में आयोजित बैठक में इस किसान यात्रा पर सर्वसम्मति से मुहर लगी। बैठक में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना और गुजरात सहित कई राज्यों के प्रमुख किसान नेता शामिल हुए। नेताओं ने कहा कि खेती किसानी आज सबसे बड़े संकट के दौर से गुजर रही है और सरकार की नीतियों ने किसान को कर्ज़ के दलदल में धकेल दिया है।
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के जिला अध्यक्ष चौ. अक्षु त्यागी ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक संगठन या प्रदेश की नहीं, बल्कि पूरे देश के किसान को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह आंदोलन देश के कोने-कोने से होकर गुजरेगा और अंत में दिल्ली पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर किसान को उसकी फसल का वाजिब दाम और कर्ज़ से मुक्ति नहीं मिली, तो खेती का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
किसान नेताओं ने बताया कि यात्रा के दौरान देशभर में किसान पंचायतों का आयोजन किया जाएगा, जहां लाखों गांवों से किसानों की मांगों के समर्थन में प्रस्ताव पारित कराए जाएंगे। इन प्रस्तावों को 19 मार्च को दिल्ली में प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा। आंदोलन के जरिए सरकार पर यह दबाव बनाया जाएगा कि वह किसानों के लिए ठोस और स्थायी नीति बनाए।
बैठक में संगठन को नई जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं। जगजीत सिंह डल्लेवाल को राष्ट्रीय संयोजक, कुर्बरु शांताकुमार को राष्ट्रीय सहसंयोजक, हर्षदीप सिंह को राष्ट्रीय सचिव और महावीर सहारणा को राष्ट्रीय सह-सचिव बनाया गया।
किसान नेताओं ने सरकार के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा जाता है कि पैदावार बढ़ने से किसान खुशहाल हो रहा है। उनका कहना है कि बढ़ती पैदावार किसान की मजबूरी है, क्योंकि कर्ज़ चुकाने के लिए उसे अधिक उर्वरक, महंगी तकनीक और बढ़ी हुई लागत के सहारे उत्पादन बढ़ाना पड़ रहा है, जबकि फसलों के दाम लगातार गिरते जा रहे हैं। यही कारण है कि किसान कर्ज़ से निकलने की बजाय और अधिक उसमें फंसता जा रहा है।
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) का राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल इससे पहले 9 जनवरी 2026 को पंचकूला में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी से कृषि मुद्दों पर मुलाकात कर चुका है और अब संसद की कृषि मामलों की स्थायी समिति से भी बातचीत की तैयारी है। किसान नेताओं ने दो टूक कहा कि यदि सरकार ने किसानों की आवाज़ नहीं सुनी, तो यह यात्रा एक बड़े और निर्णायक जनआंदोलन का रूप लेगी।
