रिपोर्ट – मो0 नसीम

बाराबंकी। जनपद के हैदरगढ़ टोल प्लाज़ा पर 14 जनवरी 2026 को कानून व्यवस्था को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। टोल कर्मियों द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता श्री रतनेश शुक्ला पर सरेआम जानलेवा हमला किया गया। घटना के दौरान अधिवक्ता सड़क पर पड़े तड़पते रहे और पानी की गुहार लगाते रहे, लेकिन टोल कर्मियों ने मदद के बजाय गालियों और लाठी-डंडों से हमला जारी रखा।
यह पूरी घटना कैमरों में कैद हुई और सोशल मीडिया पर वायरल होते ही अधिवक्ता समाज में भारी आक्रोश फैल गया। लखनऊ हाईकोर्ट की तेजतर्रार अधिवक्ता अंशू सिंह ने इस हमले को पूरे न्याय तंत्र पर हमला बताते हुए कहा कि सिर्फ तीन गिरफ्तारियां नाकाफी हैं और टोल मैनेजर सहित सभी आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाया जाना चाहिए।
घटना के विरोध में 15 जनवरी को बाराबंकी से लेकर लखनऊ तक के सैकड़ों अधिवक्ता हैदरगढ़ टोल प्लाज़ा पर धरने पर बैठ गए। कड़कती ठंड और रात के अंधेरे में भी अधिवक्ताओं ने सड़क पर लेटकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन से तीखी नोकझोंक हुई और अधिवक्ताओं ने साफ चेतावनी दी कि जब तक मुख्य आरोपी टोल मैनेजर की गिरफ्तारी और रासुका की कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
मौके पर SDM, CO सहित भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात रही, लेकिन अधिवक्ता अपने मांगों पर अडिग रहे। नारेबाजी के बीच यह आंदोलन अब कानून, सम्मान और न्याय की लड़ाई का प्रतीक बन गया है।
यह घटना न सिर्फ अधिवक्ता समाज बल्कि पूरे कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। अब देखना यह है कि प्रशासन दोषियों पर सख्त कार्रवाई करता है या न्याय एक बार फिर सड़क पर ही दम तोड़ देता है।
