रिपोर्ट – अनिल कुमार

फतेहपुर। जनपद देवमई ब्लॉक के मुसाफा स्थित उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की शाखा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। खाताधारक नवनीत कुमार का आरोप है कि उनके खाते में ₹2,00,000 की धनराशि आने के तुरंत बाद बिना किसी स्पष्ट कारण के खाता ब्लॉक कर दिया गया। पीड़ित का कहना है कि जब उन्होंने शाखा प्रबंधक आशीष कुमार से खाता ब्लॉक किए जाने का लिखित कारण मांगा, तो कोई लिखित जवाब नहीं दिया गया। पीड़ित के अनुसार, खाता में रकम वैध रूप से प्राप्त हुई थी, इसके बावजूद कार्रवाई की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने बैंकिंग पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों का दावा: सूत्र बताते हैं कि शाखा में बिचौलियों के जरिए काम कराने की शिकायतें पहले से आती रही हैं और हालिया मामला उसी कड़ी से जुड़ा हो सकता है। आरोप है कि नियमों की आड़ में खातों को रोका जाता है और फिर “सेटिंग” के जरिए रास्ता निकाला जाता है।
ग्राहकों में रोष: स्थानीय खाताधारकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि लेन-देन संदिग्ध होता तो बैंक को लिखित नोटिस, कारण और समय-सीमा बतानी चाहिए थी, न कि मनमाने तरीके से खाता रोक देना।
जवाबदेही की मांग: मामले में उच्चस्तरीय जांच, सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा, और शाखा में बिचौलियों की भूमिका की पड़ताल की मांग उठ रही है। साथ ही पीड़ित को लिखित स्पष्टीकरण और खाते की तत्काल बहाली की मांग की जा रही है।
सवाल सीधा है—ग्रामीण बैंक में खाताधारकों के पैसे की सुरक्षा और पारदर्शिता आखिर कब सुनिश्चित होगी?
