रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। संभल के सीओ कुलदीप कुमार को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की कथित अभद्र टिप्पणी पर अब सियासी और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। इसी क्रम में अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने ओवैसी के बयान पर तीखा जवाब देते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना, अमर्यादित और पद की गरिमा के विपरीत बताया है। उन्होंने कहा कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति, खासकर एक पुलिस अधिकारी, के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न केवल निंदनीय है, बल्कि सार्वजनिक जीवन की मर्यादाओं को भी ठेस पहुंचाने वाला है।
डॉ. सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने कहा कि भारत किसी एक व्यक्ति, परिवार या दल की जागीर नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की साझा आस्था, सम्मान और अधिकारों का राष्ट्र है। उन्होंने कहा कि “यह देश किसी के बाप का नहीं, बल्कि सबका है।” उन्होंने आगे कहा कि भारत माता समस्त देशवासियों की माता हैं और यही इस देश की सांस्कृतिक आत्मा और पहचान है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक दल के शीर्ष नेता को शब्दों की मर्यादा और सार्वजनिक जिम्मेदारी का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह खुद एक बैरिस्टर और सांसद हैं, इसलिए उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अपने पद की गरिमा के अनुरूप बोलें। डॉ. सिद्धार्थ ने कहा कि भड़काऊ और व्यक्तिगत टिप्पणियां समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करती हैं और जनता के बीच गलत संदेश भेजती हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन भाषा का स्तर गिराकर माहौल को विषाक्त बनाना किसी भी सूरत में उचित नहीं माना जा सकता।
डॉ. भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि अखिल भारत हिंदू महासभा देश के सबसे पुराने संगठनों में से एक है और वह संविधान की मर्यादा में रहकर अपनी बात कहती और कार्य करती है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि संगठन को हल्के में लेने की भूल कोई न करे। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि उनका संगठन लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर ही अपनी प्रतिक्रिया देता है।
ओवैसी के कथित बयान के विरोध में दिए गए इस जवाब को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। मामला अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि भाषा, राजनीतिक शालीनता और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा को लेकर बहस का विषय बनता जा रहा है। डॉ. सिद्धार्थ भट्टाचार्य का यह बयान हिंदू महासभा की ओर से स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि वह इस मुद्दे पर चुप रहने के पक्ष में नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस विवाद पर आगे अन्य राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। फिलहाल, डॉ. सिद्धार्थ भट्टाचार्य के बयान ने इस विवाद को और अधिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

