रिपोर्ट – हरीश

हमीरपुर। मुख्यालय में सोमवार देर रात राजकीय इंटर कॉलेज के पास पुराने पावर हाउस के निकट आवारा सांड कई घंटों तक गंभीर हालत में छटपटाता रहा, बाद में उसकी मौत हो गयी। उसके मुंह से झाग निकल रहा था और आसपास बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे, जो उसे बचाने की कोशिश करते रहे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रात करीब 10.30 बजे लोगों ने सांड को छटपटाते हुए देखा। आशंका जताई गई कि शायद उसे करंट लग गया हो, क्योंकि वह ट्रांसफार्मर के पास पड़ा था।
इसके बाद लोगों ने सांड को खींचकर टांसफार्मर की जाली से दूर किया। कुछ लोगों ने जहरीले कीड़े के काटने या आसपास पड़े थर्माकोल के टुकड़े खाने से उसकी हालत बिगड़ने की भी आशंका जताई।
मौके पर मौजूद लोगों ने सांड को बचाने के लिए काफी प्रयास किए। उसकी गर्दन सहलाकर यह देखने की कोशिश की, कि कहीं गले में कुछ फंसा तो नहीं है। उसे उठाकर बैठाने की भी कोशिश की, लेकिन सांड की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
इस दौरान लोगों ने कई बार पशु चिकित्सकों को फोन किया, लेकिन उनके नंबर स्विच ऑफ मिले। पशु चिकित्सा की आपातकालीन सेवा 1962 पर भी कई बार कॉल की गई, मगर वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला। सूचना मिलने पर कोतवाली के दरोगा भी मौके पर पहुंचे और हालात पर नजर बनाए रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर पशु चिकित्सक पहुंच जाते तो शायद सांड की जान बचाई जा सकती थी। देर रात तक लोग मौके पर डटे रहे, लेकिन जब तक पशु चिकित्सक पहुंचे, तब तक सांड दम तोड़ चुका था।
इस घटना के बाद हिंदू संगठनों ने पशुपालन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि आपातकालीन सेवाएं समय पर उपलब्ध नहीं होने से एक बेजुबान जानवर की मौत हो गई। उन्होंने मामले की जांच कराए जाने की मांग की है।

