रिपोर्ट – हरीश

हमीरपुर। देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने एक बेमिसाल बलिदान के साक्षी भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहीद दिवस पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि ये तीनों युवा क्रांतिकारी मातृभूमि के सच्चे सपूत थे। भगतसिंह और उनके साथियों ने 1928 में सांडर्स को मौत के घाट उतारकर महान देशभक्त लाला लाजपत राय की मौत का बदला लिया था। ये तीनों युवा उस समय लगभग 23-24 वर्ष के थे। भगतसिंह और उनके साथियों ने 8 अप्रैल 1929 को असेम्बली में बम फेंककर अंग्रेजी सरकार को चुनौती दी थी। ये तीनों युवा प्रारम्भ से ही देशसेवी सोच के थे। अंग्रेजों ने इन तीनों को लाहौर में 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी थी। इन तीनों की शहादत देश सदैव याद रखेगा। इस श्रृद्धांजलि कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, सिद्धा, प्रेम, सागर, महावीर प्रजापति, रामनरायन सोनकर, रामबाबू, पप्पू सोनकर, राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।

