मंदिरों से अर्थव्यवस्था तक: ‘शाश्वत हिंदू प्रतिष्ठान’ का बड़ा दांव, मुजफ्फरनगर में नई टीम का ऐलान

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रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। जनपद में शनिवार को ‘शाश्वत हिंदू प्रतिष्ठान’ ने एक अहम प्रेस वार्ता कर मंदिरों को सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाने का बड़ा रोडमैप पेश किया। संगठन ने साफ किया कि अब मंदिर केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें समाज के समग्र विकास और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के मजबूत स्तंभ के रूप में विकसित किया जाएगा।
प्रेस वार्ता में संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री संजय शर्मा ने ‘शाश्वत प्रांगण’ की अवधारणा सामने रखते हुए कहा कि मंदिरों के इर्द-गिर्द सामाजिक समरसता, रोजगार और जनकल्याण की नई धारा प्रवाहित की जाएगी। उनका दावा है कि इससे समाज के हर वर्ग को जोड़ते हुए एक सशक्त और आत्मनिर्भर ढांचा खड़ा किया जा सकेगा।
आर्थिक मोर्चे पर संगठन ने डिजिटल और स्वदेशी पहल को आगे बढ़ाते हुए ‘शाश्वत बाजार’ नामक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की घोषणा की। इस प्लेटफॉर्म के जरिए स्थानीय व्यापारियों और लघु उद्योगों को सीधे ग्राहकों से जोड़ने की योजना है, जिससे ‘लोकल फॉर वोकल’ को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही ‘शाश्वत कार्ड’ (डेबिट कार्ड) योजना भी पेश की गई है, जिसमें हर लेन-देन का एक हिस्सा मंदिरों के संरक्षण और जनकल्याण कार्यों में जाएगा। वहीं ‘आशीर्वाद कार्ड’ को लॉयल्टी और रिवॉर्ड सिस्टम से जोड़कर उपभोक्ताओं को विभिन्न संस्थानों में छूट और सुविधाएं देने की बात कही गई है।
संगठन ने इस दौरान जनपद में अपने विस्तार को भी गति देते हुए नई टीम की घोषणा की। उद्योगपति अभिनव स्वरूप को जिला अध्यक्ष और श्रवण अग्रवाल को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि नई टीम के नेतृत्व में सांस्कृतिक मूल्यों को संजोते हुए आर्थिक सशक्तिकरण का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जाएगा।
प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि भारत की प्राचीन अर्थव्यवस्था का आधार मंदिर हुआ करते थे, जहां से व्यापार और सामाजिक संरचना को मजबूती मिलती थी। इसी परंपरा को आधुनिक तकनीक जैसे फिनटेक और ई-कॉमर्स के साथ जोड़कर एक नया इकोसिस्टम तैयार करने की योजना है, जो आने वाले समय में व्यापारियों और आम जनता दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
संगठन की इस पहल को लेकर जहां समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है, वहीं अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह मॉडल जमीनी स्तर पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू हो पाता है।

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