रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ्फरनगर। मीरापुर विधानसभा क्षेत्र की मोरना सहकारी शुगर मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने को लेकर उत्तर प्रदेश शासन से मिली ऐतिहासिक मंजूरी जहां क्षेत्र के किसानों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है, वहीं इसी उपलब्धि का श्रेय लेने की होड़ ने राष्ट्रीय लोकदल की अंदरूनी राजनीति को सरेआम बेनकाब कर दिया। मंजूरी की घोषणा बिजनौर से रालोद सांसद चंदन सिंह चौहान द्वारा किए जाने के बाद मोरना सहकारी शुगर मिल परिसर में भव्य प्रेस वार्ता और जन संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, लेकिन यह कार्यक्रम उपलब्धियों से ज्यादा सियासी नाराज़गी और टकराव के कारण चर्चा में आ गया।
खबर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से हैं आपको बता दें प्रेस वार्ता उस वक्त असहज मोड़ पर पहुंच गई जब मीरापुर विधानसभा उपचुनाव जीतकर आईं रालोद विधायक मिथिलेश पाल का फोटो मंच पर लगे होर्डिंग और बैनरों से नदारद पाया गया। इसे विधायक ने अपना घोर अपमान बताया। वह कार्यक्रम स्थल पर तो पहुंचीं, लेकिन सांसद चंदन सिंह चौहान के बार-बार आग्रह के बावजूद मंच पर जाने से साफ इनकार कर दिया। नाराज़गी यहीं नहीं रुकी, विधायक ने मंच पर मौजूद राष्ट्रीय लोकदल के वरिष्ठ नेताओं, चौधरी चरण सिंह और सांसद चंदन चौहान के पिता व दादा के चित्रों पर माल्यार्पण तक नहीं किया, जिससे माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया।
हालात बिगड़ते देख रालोद के पूर्व कैबिनेट मंत्री योगराज सिंह ने हस्तक्षेप किया और विधायक से अलग में बातचीत कर उन्हें मनाया। इसके बाद मिथिलेश पाल ने अकेले में नेताओं के चित्रों पर माल्यार्पण किया। स्थिति संभालने के प्रयास में रालोद के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार मंच से नीचे उतरकर आए, विधायक का हाथ थामकर उन्हें मंच तक लाए और अपने पास बैठाया। इस दौरान विधायक के समर्थकों ने भी कड़ा विरोध जताया और खुले तौर पर कहा कि जब विधायक का फोटो तक नहीं लगाया गया, तो मंच साझा करने का कोई औचित्य नहीं था।
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम से पहले रालोद जिला अध्यक्ष संदीप मलिक ने आसपास लगे कुछ होर्डिंग हटवा दिए थे, जिनमें विधायक का फोटो नहीं था। इसके बावजूद जब मंच पर सांसद चंदन सिंह चौहान का फोटो वाला बड़ा बैनर लगाया जा रहा था, तो उसे रोकने की कोशिश हुई। हालांकि चंदन चौहान के समर्थकों ने बैनर लगा दिया, जिससे मीरापुर विधायक और रालोद के एक गुट में नाराज़गी और ज्यादा गहरा गई।
इस पूरे घटनाक्रम ने सांसद चंदन सिंह चौहान और विधायक मिथिलेश पाल के बीच लंबे समय से चली आ रही समन्वय की कमी को सार्वजनिक मंच पर उजागर कर दिया। गौरतलब है कि चंदन सिंह चौहान पहले मीरापुर से विधायक रह चुके हैं। विधायक रहते हुए उन्होंने बिजनौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, जिसके चलते मीरापुर विधानसभा सीट खाली हुई। तब कयास लगाए जा रहे थे कि इस सीट से चंदन चौहान की धर्मपत्नी को टिकट मिलेगा, लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने रणनीति बदलते हुए मिथिलेश पाल को प्रत्याशी बनाया और उन्होंने उपचुनाव जीत लिया।
तभी से दोनों नेताओं के बीच आपसी तालमेल की कमी की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में चल रही थीं, जो अब मोरना शुगर मिल की प्रेस वार्ता के दौरान खुले टकराव के रूप में सामने आ गईं। एक ओर शुगर मिल की पेराई क्षमता बढ़ने की मंजूरी को किसान हित में बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर रालोद की अंदरूनी खींचतान ने इस खुशी पर सियासी साया डाल दिया है।
