मुजफ्फरनगर में जिला कार्यालय पर गूंजा काम के अधिकार का सवाल
रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ्फरनगर। केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी अभियान “मनरेगा बचाओ संग्राम” अब जिले में पूरी ताकत के साथ जमीन पर उतर आया है। इसी कड़ी में मुज़फ्फरनगर जिला कांग्रेस कार्यालय पर एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन को गांव-गांव तक ले जाने और आंदोलन को धारदार बनाने की ठोस रणनीति तय की गई।
बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सतपाल कटारिया ने की।
बैठक को संबोधित करते हुए सतपाल कटारिया ने तीखे शब्दों में कहा कि मनरेगा कोई साधारण सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों का संवैधानिक काम का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नया VB-GRAM-G अधिनियम मनरेगा की मूल भावना पर सीधा हमला है। यह कानून मजदूरों, किसानों और ग्रामीण परिवारों की रोजी-रोटी छीनने की साजिश है, जिसे कांग्रेस किसी भी सूरत में सफल नहीं होने देगी।
कटारिया ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर जनता को इस साजिश की सच्चाई बताएं और कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी आंदोलन को मजबूती प्रदान करें। उन्होंने कहा कि यदि मनरेगा कमजोर होती है तो इसका सबसे बड़ा खामियाजा ग्रामीण मजदूरों और महिलाओं को भुगतना पड़ेगा, जिनके लिए यह योजना जीवनरेखा बनी हुई है।
बैठक में मनरेगा बचाओ संग्राम के जिला कोऑर्डिनेटर की भूमिका को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। कोऑर्डिनेटर को जिले के सभी ब्लॉकों और ग्राम स्तर पर कार्यक्रमों का समन्वय करने, कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां तय करने और प्रदेश नेतृत्व के निर्देशों को जमीन तक पहुंचाने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। तय किया गया कि 10 जनवरी से 25 फरवरी 2026 तक चलने वाले आंदोलन के दौरान पदयात्राएं, जनसभाएं, ज्ञापन और व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाए जाएंगे।
कांग्रेस नेताओं ने एक स्वर में कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण भारत को वर्षों तक संबल दिया है, पलायन रोका है और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। ऐसे में इस योजना को कमजोर करने का हर प्रयास सीधे-सीधे ग्रामीण भारत पर हमला है। कांग्रेस इस लड़ाई को सड़कों से संसद तक लड़ेगी।
बैठक के अंत में मौजूद सभी कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि “मनरेगा बचाओ संग्राम” को मुज़फ्फरनगर जनपद में जन-जन का आंदोलन बनाया जाएगा और काम के अधिकार की इस निर्णायक लड़ाई को पूरी मजबूती के साथ लड़ा जाएगा।
