रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ्फरनगर। ग्राम बगोवाली में मतदाता सूची संशोधन कार्य के दौरान बीएलओ की लापरवाही और मनमानी के कारण ग्रामीणों में भारी रोष पनप रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि बीएलओ को नियमों के अनुसार घर-घर जाकर फॉर्म उपलब्ध कराने चाहिए, लेकिन वह लगातार इस प्रक्रिया को नज़रअंदाज़ कर एक ही स्थान पर बैठकर फॉर्म बांट रहे हैं। इससे गांव के सैकड़ों लोग परेशान हैं और बार-बार चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं।
गांव के बुज़ुर्गों ने बताया कि बीएलओ की इस कार्यशैली से कई वृद्ध महिला-पुरुष, जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं, अपना फॉर्म जमा नहीं कर पा रहे। कुछ लोगों ने बताया कि जब वे बताए गए स्थान पर पहुंचे तो बीएलओ वहां मौजूद नहीं थे, या फिर थोड़ी देर में आने की बात कहकर चले जाते हैं। इससे ग्रामीणों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और अंत में थक-हारकर वापस लौटना पड़ता है।
ग्राम प्रधान बगोवाली ने भी इस लापरवाही पर गहरी आपत्ति जताई है। प्रधान का कहना है कि सरकार की योजना और चुनाव आयोग के निर्देश स्पष्ट हैं कि बीएलओ नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाएंगे, लेकिन गांव में इसका पालन बिल्कुल नहीं हो रहा है। “हमने कई बार बीएलओ को घर-घर जाने के लिए कहा, लेकिन वह लगातार एक ही जगह बैठकर ग्रामीणों को बुला रहे हैं। इससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है,” प्रधान ने कहा।
गांव के मजदूर वर्ग के लोगों ने बताया कि सुबह से काम पर जाने और शाम को लौटने के कारण उन्हें फॉर्म से संबंधित कार्य के लिए सही समय नहीं मिल पाता। “जब हम पहुंचते हैं, तब तक बीएलओ जा चुके होते हैं। कई बार छुट्टी लेकर भी आए लेकिन काम नहीं हुआ,” ग्रामीणों ने शिकायत की।
महिलाओं ने भी शिकायत की कि उन्हें बच्चों और घर के काम के बीच समय निकाल कर फॉर्म भरने जाना पड़ता है, लेकिन बीएलओ के न मिलने से उन्हें कई बार लौटना पड़ा। कई गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की माताओं ने कहा कि बार-बार चक्कर काटना उनके लिए बेहद कठिन हो रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि बीएलओ बिना किसी सूचना के अलग-अलग समय पर आते-जाते हैं, जिससे लोगों को सही जानकारी नहीं मिल पाती। “यदि घर-घर फॉर्म नहीं देना, तो कम से कम तय समय और स्थान की जानकारी तो दी जाए, ताकि लोग बेवजह परेशान न हों,” ग्रामीणों ने कहा।
ग्राम प्रधान ने प्रशासन से मांग की है कि बीएलओ की कार्यप्रणाली की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए, ताकि गांव में मतदाता सूची संशोधन कार्य सुचारू रूप से चल सके और हर पात्र व्यक्ति को उनका अधिकार मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे एसडीएम और जिला प्रशासन से सामूहिक रूप से मिलकर शिकायत दर्ज कराएंगे।
