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कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने पर जोर, डीएम ईशान प्रताप सिंह ने अधिकारियों को दिए अहम निर्देश

रिपोर्ट: संदीप वर्मा

बाराबंकी जनपद में युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से रोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रशासन ने सक्रिय कदम तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में जिलाधिकारी Ishan Pratap Singh की अध्यक्षता में डीआरडीए स्थित गांधी सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कौशल विकास योजनाओं, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली, प्रशिक्षार्थियों के सेवायोजन और मुख्यमंत्री अप्रेन्टिसशिप योजना के प्रभावी संचालन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कौशल विकास कार्यक्रमों का लाभ जनपद के अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाया जाए। साथ ही उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान समय में रोजगारोन्मुख शिक्षा और तकनीकी दक्षता ही युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसलिए प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता, ट्रेड चयन और सेवायोजन व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाना आवश्यक है।


मुख्यमंत्री अप्रेन्टिसशिप योजना की हुई समीक्षा

बैठक में मुख्यमंत्री अप्रेन्टिसशिप योजना की अद्यतन प्रगति की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से योजना के लाभार्थियों की संख्या, प्रशिक्षण की स्थिति और रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जानकारी ली।

उन्होंने कहा कि यह योजना युवाओं को व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ-साथ उद्योगों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं योजना से लाभान्वित हों।

डीएम ने निर्देश दिए कि प्रशिक्षण संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों के बीच नियमित संवाद स्थापित किया जाए ताकि प्रशिक्षार्थियों को वास्तविक कार्य अनुभव मिल सके। उन्होंने समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया।


रोजगार वाले ट्रेडों को बढ़ावा देने के निर्देश

जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने कहा कि ऐसे ट्रेडों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिनमें रोजगार की संभावनाएं अधिक हों। उन्होंने पॉलिटेक्निक और आईटीआई संस्थानों में ट्रेडवार मेधावी छात्रों को चिन्हित करने के निर्देश दिए ताकि उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि जनपद में संचालित बड़ी औद्योगिक इकाइयों और फैक्टरियों को प्रशिक्षण संस्थानों को गोद लेने के लिए प्रेरित किया जाए। इससे विद्यार्थियों को उद्योगों की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिलेगा और उनकी तकनीकी दक्षता भी बढ़ेगी।

जिलाधिकारी ने सुझाव दिया कि उद्योग विशेषज्ञों द्वारा समय-समय पर गेस्ट लेक्चर, तकनीकी सत्र और व्यवहारिक प्रशिक्षण आयोजित किए जाएं, जिससे छात्र उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार हो सकें।


प्रशिक्षण संस्थानों में अनुशासन और गुणवत्ता पर जोर

बैठक में प्रशिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली और उपस्थिति व्यवस्था पर भी विशेष चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रशिक्षकों और प्रशिक्षार्थियों की नियमित एवं समयबद्ध उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि संस्थानों में नियमित मॉनिटरिंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और अनुपस्थित रहने वाले प्रशिक्षार्थियों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाए।

डीएम ने कहा कि केवल प्रमाणपत्र देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाला युवा वास्तव में रोजगार के योग्य बने। इसके लिए प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखना आवश्यक है।


घटती मांग वाले ट्रेड बंद करने पर विचार

बैठक के दौरान उद्योग-व्यवसाय मैपिंग और सेवायोजन की प्रगति की समीक्षा में यह तथ्य सामने आया कि कुछ ट्रेडों में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं की संख्या लगातार कम हो रही है। साथ ही इन ट्रेडों में रोजगार के अवसर भी सीमित पाए गए।

इस पर जिलाधिकारी ने अप्रासंगिक और कम उपयोगी ट्रेडों को बंद करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान रोजगार बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए नए और आधुनिक पाठ्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए।

बैठक में फूड प्रोसेसिंग, एग्रो प्रोसेसिंग और सोलर टेक्नीशियन जैसे नए रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों को शुरू करने पर विशेष चर्चा की गई। अधिकारियों का मानना है कि इन क्षेत्रों में आने वाले समय में रोजगार की संभावनाएं तेजी से बढ़ेंगी।


युवाओं को इंटर्नशिप और अप्रेन्टिसशिप से जोड़ने की पहल

जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्रशिक्षार्थियों को अधिक से अधिक अप्रेन्टिसशिप और इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान से रोजगार नहीं मिलता, बल्कि व्यवहारिक अनुभव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

इसके लिए निजी उद्योगों और कंपनियों से समन्वय स्थापित कर युवाओं को प्रशिक्षण के साथ रोजगार से जोड़ने के विशेष प्रयास किए जाएं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्थानीय उद्योगों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएं ताकि प्रशिक्षित युवाओं को तुरंत रोजगार मिल सके।

डीएम ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है और कौशल विकास योजनाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।


युवाओं के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में कदम

बैठक में मौजूद अधिकारियों और संस्थान प्रमुखों ने भी कौशल विकास कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने के सुझाव दिए। अधिकारियों ने माना कि बदलते समय के साथ प्रशिक्षण व्यवस्था में तकनीकी सुधार और आधुनिक पाठ्यक्रमों को शामिल करना जरूरी है।

प्रशासन का मानना है कि यदि युवाओं को सही दिशा में प्रशिक्षण और उद्योगों से जुड़ाव मिलेगा तो जिले में बेरोजगारी कम होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने बैठक के अंत में सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने और निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।

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