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मुजफ्फरनगर में माटीकला शिल्पियों को किया गया जागरूक, सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान

रिपोर्ट: कबीर

स्थान: मुजफ्फरनगर

माटीकला बोर्ड स्थापना पखवाड़ा के तहत हुआ जागरूकता कार्यक्रम

मुजफ्फरनगर में उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड के नौवें स्थापना दिवस के अवसर पर “माटीकला बोर्ड स्थापना पखवाड़ा” के अंतर्गत रुड़की रोड स्थित कंबल कारखाना परिसर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य माटीकला से जुड़े शिल्पियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।

शिल्पियों को योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी

कार्यक्रम में जिला ग्रामोद्योग अधिकारी सोमप्रकाश ने अतिथियों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना, निःशुल्क टूल-किट वितरण, कौशल विकास प्रशिक्षण, विपणन विकास सहायता, माइक्रो माटीकला कॉमन फैसिलिटी सेंटर, माटीकला पुरस्कार एवं पंजीकरण जैसी विभिन्न योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शिल्पियों से इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।

आत्मनिर्भर बनने का दिया संदेश

मुख्य अतिथि एवं नगर पालिका परिषद अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने कहा कि माटीकला से जुड़े सभी शिल्पी विभाग के निरंतर संपर्क में रहें और सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का पूरा लाभ लेकर अपने रोजगार और व्यवसाय को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कला और शिल्प को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला पंचायत प्रशासक डॉ. वीरपाल सिंह निर्वाल ने कहा कि माटीकला बोर्ड की योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने पात्र लाभार्थियों से योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने और अपने व्यवसाय का विस्तार करने का आह्वान किया।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता सुधीर खटीक ने भी अपने विचार रखे और माटीकला शिल्पियों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। समापन अवसर पर जिला ग्रामोद्योग अधिकारी सोमप्रकाश ने सभी अतिथियों, अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं माटी शिल्पियों का आभार व्यक्त किया।

इस दौरान अग्रणी जिला बैंक प्रबंधक, पंजाब नेशनल बैंक के प्रतिनिधि, डूडा विभाग के अधिकारी तथा ग्रामोद्योग विभाग के कर्मचारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में माटीकला के संरक्षण, रोजगार सृजन और शिल्पियों के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया गया।

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