रिपोर्ट: कबीर
मुजफ्फरनगर
मुजफ्फरनगर जनपद के बुढ़ाना विकासखंड स्थित ग्राम सफीपुर पट्टी में शनिवार को पशुपालकों और किसानों के लिए एक दिवसीय नि:शुल्क पशु स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ, पशुपालन विभाग तथा इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। शिविर का उद्देश्य पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य, संक्रामक रोगों की रोकथाम और आधुनिक पशुपालन के प्रति किसानों को जागरूक करना था।
135 से अधिक पशुओं की हुई स्वास्थ्य जांच
शिविर के दौरान 135 से अधिक पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। पशु चिकित्सकों की टीम ने गर्भ परीक्षण, स्टूल जांच, सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई। जरूरतमंद पशुओं को मौके पर ही दवाएं दी गईं और पशुपालकों को कृमिनाशक दवाएं तथा मिनरल मिक्सचर नि:शुल्क वितरित किए गए।
विशेषज्ञों ने पशुपालकों को बताया कि नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार से पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है तथा दुग्ध उत्पादन और पशुओं की कार्यक्षमता में भी सुधार होता है।
कुलपति ने किसानों से सीधा संवाद किया
कार्यक्रम में सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने किसानों और पशुपालकों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शिक्षा और अनुसंधान तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय की टीम गांव-गांव जाकर किसानों और पशुपालकों की समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद को मजबूत बनाते हैं तथा नई तकनीकों और वैज्ञानिक जानकारी को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जल्द शुरू होगा खुरपका-मुंहपका टीकाकरण अभियान
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार गुप्ता ने जानकारी दी कि प्रदेश में जल्द ही खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा। इसके लिए विभाग की टीमें गठित की जा चुकी हैं, जो गांव-गांव और घर-घर जाकर पशुओं का नि:शुल्क टीकाकरण करेंगी।
उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण अवश्य कराएं, जिससे उन्हें संक्रामक रोगों से सुरक्षित रखा जा सके और आर्थिक नुकसान से बचाव हो।
रोगों से बचाव के लिए जागरूकता पर दिया गया जोर
परियोजना प्रभारी प्रो. अमित वर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खुरपका-मुंहपका, गलघोटू और अन्य संक्रामक रोगों के कारण कई पशुओं की मृत्यु हुई थी। इसके साथ ही दुग्ध उत्पादन में भी कमी आई, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि यदि पशुपालक नियमित टीकाकरण, संतुलित पोषण, स्वच्छ वातावरण और समय पर उपचार जैसी सावधानियां अपनाएं तो अधिकांश संक्रामक रोगों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने दिए आधुनिक पशुपालन के सुझाव
शिविर में मौजूद पशु चिकित्सकों की टीम ने पशुपालकों को आधुनिक पशुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी दीं। विशेषज्ञों ने पशुओं के संतुलित आहार, कृमिनाशन, स्वच्छ प्रबंधन, समय पर टीकाकरण और रोगों की शुरुआती पहचान के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि स्वस्थ पशु ही बेहतर उत्पादन देते हैं और पशुपालकों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए नियमित देखभाल और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने दी सेवाएं
शिविर में डॉ. अफरोज, डॉ. तरुण कुमार, डॉ. शुभमदीप, डॉ. आशुतोष राय, डॉ. स्नेहा गुप्ता, डॉ. इशिता और डॉ. ईशान सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने पशुओं की जांच कर आवश्यक उपचार प्रदान किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शिव कुमार गंगवार, दिनेश गुप्ता, विक्रम तथा स्थानीय ग्रामीणों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
निष्कर्ष
ग्राम सफीपुर पट्टी में आयोजित यह नि:शुल्क पशु स्वास्थ्य शिविर किसानों और पशुपालकों के लिए उपयोगी साबित हुआ। शिविर के माध्यम से पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार, नि:शुल्क दवा वितरण और वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराई गई। साथ ही आगामी खुरपका-मुंहपका टीकाकरण अभियान के प्रति भी पशुपालकों को जागरूक किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित टीकाकरण, वैज्ञानिक पशुपालन और समय पर उपचार अपनाकर पशुओं को संक्रामक रोगों से सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और पशुधन संरक्षण में भी महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
