रिपोर्टर: कबीर (मुजफ्फरनगर)
वैदिक मंत्रोच्चारण और हवन-यज्ञ के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
मुजफ्फरनगर।
मोरना क्षेत्र में बुधवार को महाराज दक्ष प्रजापति जयंती श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर दक्ष प्रजापति ट्रस्ट के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा एवं धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हवन-यज्ञ में आहुतियां देकर किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
फीता काटकर किया गया शोभायात्रा का शुभारंभ
शोभायात्रा का शुभारंभ मुख्य अतिथि दारा सिंह प्रजापति, बसपा नेता एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी, ने फीता काटकर किया। इसके बाद भगवान महाराज दक्ष प्रजापति की सुसज्जित प्रतिमा को घोड़ा-बग्गी में विराजमान कर यात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा गांव के मेला ग्राउंड से शुरू होकर मुख्य बाजार, मुजफ्फरनगर मार्ग, शुकतीर्थ मार्ग और जानसठ मार्ग सहित विभिन्न प्रमुख रास्तों से होकर प्रजापति धर्मशाला पहुंची, जहां इसका समापन हुआ।
बैंड-बाजे, झांकियां और भक्ति गीत बने आकर्षण
यात्रा में शामिल बैंड-बाजों की मधुर धुनों, धार्मिक भजनों और आकर्षक झांकियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते हुए शोभायात्रा के साथ चलते रहे।
मार्ग में विभिन्न स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। सुसज्जित झांकियां और भगवान दक्ष प्रजापति की प्रतिमा श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं।
बड़ी संख्या में शामिल हुए श्रद्धालु
कार्यक्रम में महिला, पुरुष, युवा और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ भगवान दक्ष प्रजापति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की और धार्मिक वातावरण को और अधिक उत्साहपूर्ण बनाया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर संजीव प्रजापति, अरुण पाल, राजकुमार प्रजापति, मांगेराम प्रजापति, बोबी प्रजापति, अनिल ब्रजवासी, टीटू प्रजापति, ऋषि प्रजापति, राहुल प्रजापति, सुनील प्रजापति, मनोज तथा डॉ. सोहनवीर प्रजापति सहित अनेक गणमान्य लोग एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
मोरना में आयोजित महाराज दक्ष प्रजापति जयंती समारोह धार्मिक आस्था और सामाजिक सहभागिता का प्रतीक बना। भव्य शोभायात्रा, हवन-यज्ञ और श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया तथा समाज में एकता, सांस्कृतिक परंपराओं और धार्मिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश दिया।
