रिपोर्ट – कबीर
मुजफ्फरनगर। गन्ना मूल्य में वृद्धि समेत किसानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। संगठन ने आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य बढ़ाकर 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग उठाई। धरने के दौरान किसानों की फसल क्षति, आलू के बीज की बढ़ती कीमत, उर्वरकों की उपलब्धता और चकबंदी में कथित अनियमितताओं सहित कई मुद्दे उठाए गए। प्रदर्शन के बाद संगठन ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपे।
धरने की अध्यक्षता भोकरहेड़ी निवासी चंद्रवीर सहरावत ने की, जबकि संचालन मोहित मलिक और अंकित जावला ने संयुक्त रूप से किया। धरने को संबोधित करते हुए संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि किसानों को उनकी मेहनत और उत्पादन लागत के अनुरूप फसलों का मूल्य नहीं मिल रहा है, जिसके कारण किसान लगातार कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष टॉप बोरर कीट के कारण किसानों को लगभग 3,300 करोड़ रुपये के उत्पादन का नुकसान हुआ, लेकिन कृषि वैज्ञानिकों की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि इस वर्ष चीनी के बाजार मूल्य में वृद्धि हुई है, इसलिए गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ किसान संगठन किसानों के वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाकर दूसरे विषयों में उलझे हुए हैं। उनके अनुसार, किसानों को ऐसे नेताओं से सावधान रहने की जरूरत है, जो किसान हितों के बजाय अपने निजी हितों को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कुछ किसान संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर अवैध खनन तथा डग्गामार वाहनों के संचालन में संलिप्त होने के आरोप भी लगाए।
राष्ट्रीय प्रवक्ता ने जिला प्रशासन पर भ्रष्टाचार के मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चकबंदी से जुड़ी समस्याओं के कारण किसान परेशान हैं। उन्होंने कहा कि संगठन किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए आवाज उठाता रहेगा।
मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में छह प्रमुख मांगें
संगठन की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया। इसमें गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने और किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और कृषि मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, इसलिए गन्ना मूल्य का निर्धारण उत्पादन लागत और चीनी उद्योग से होने वाली आय को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में हाल की असमय बारिश और तेज हवाओं से धान, उड़द, मूंग सहित अन्य फसलों को हुए नुकसान का गांववार सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा और पात्र किसानों को फसल बीमा का भुगतान दिलाने की मांग की गई। खेतों और खलिहानों में रखी उपज को हुए पात्र नुकसान को भी लागू नियमों के अनुसार राहत में शामिल करने की मांग उठाई गई।
आलू किसानों की समस्याओं को उठाते हुए संगठन ने कोल्ड स्टोर के किराए में सहायता संबंधी योजना का लाभ उन किसानों को भी देने की मांग की, जिन्होंने शासनादेश जारी होने से पहले आलू की निकासी कर ली थी। साथ ही उद्यान विभाग द्वारा आलू का बीज 3,600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उपलब्ध कराने पर सवाल उठाते हुए इसकी कीमत अधिकतम 1,500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मांग की गई।
ज्ञापन में ठेके और बटाई पर खेती करने वाले वास्तविक किसानों को भी मुआवजा एवं राहत योजनाओं में शामिल करने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि ऐसे किसान जमीन के मालिक नहीं होने के बावजूद बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी का खर्च उठाते हैं। ग्राम पंचायत, लेखपाल और कृषि विभाग के संयुक्त सत्यापन से उनकी पहचान कर राहत उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
इसके अलावा धान, गेहूं, गन्ना और अन्य फसलों की जरूरत के अनुसार यूरिया, डीएपी तथा अन्य उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, कालाबाजारी और जमाखोरी पर कार्रवाई करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
जिलाधिकारी को सौंपे दूसरे ज्ञापन में स्थानीय समस्याएं उठाईं
संगठन ने जिलाधिकारी को एक अलग ज्ञापन सौंपकर जनपद में किसानों से जुड़ी स्थानीय समस्याओं के समाधान की मांग की। इसमें अंश निर्धारण में हुई त्रुटियों को ठीक कराने के लिए ग्रामसभाओं में रोस्टर बनाकर कार्रवाई करने तथा ग्राम पुरबालियान में चकबंदी की समीक्षा कर कथित गलत आदेशों की जांच कराने की मांग की गई।
ज्ञापन में सर्दियों के दौरान चीनी मिलों में किसानों के लिए चाय और पशुओं के लिए गर्म पानी की उचित व्यवस्था करने, किसान दिवस में अधिकारियों के सामने होने वाली कथित गुंडागर्दी पर रोक लगाने तथा किसान दिवस में शासनादेश के अनुसार निर्धारित विषयों पर ही चर्चा कराने की मांग की गई।
संगठन ने तहसीलों में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार समाप्त करने, लेखपालों के नाम पर दलाली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने और गांवों में फसल सुखाने के लिए ग्रामसभा की खलिहान भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग भी उठाई। इसके अतिरिक्त जल जीवन मिशन के तहत खोदी गई सड़कों की मरम्मत, अमानक खाद और बीज बेचने तथा उत्पादन करने वाली इकाइयों पर कार्रवाई और कृषि विभाग की मिनी किट वितरण व्यवस्था की जांच कराने की मांग की गई।
एडीएम प्रशासन और सीओ ने लिया ज्ञापन
धरना-प्रदर्शन के दौरान अपर जिलाधिकारी प्रशासन और क्षेत्राधिकारी सिद्धार्थ ने किसानों से ज्ञापन प्राप्त किया तथा समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन दिया। संगठन के अनुसार, धरने में हजारों किसान शामिल हुए।
धरने को विपिन त्यागी, मनीष देव, मानू त्यागी, राजपाल सिंह, बाबर, शहजाद राव, कपिल बालियान, कपिल राठी, नीरज मलिक, दीपक चौधरी, काला प्रधान चौकड़ा, अमित चौधरी, विवेक भाटी, अवनीश, योगेंद्र पंवार, सत्यजीत सोम, अनुज सोम, हरिओम सोम, राजसिंह आर्य, सुमित, शिवम, कृष्ण त्यागी और सतीश भारद्वाज सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।
