रिपोर्ट – एकरार खान

गाजीपुर। जनपद के मिश्र बाजार स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मुख्य शाखा में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया जब बैंक कर्मियों ने एक जालसाज को दूसरे के खाते से अवैध रूप से पैसा निकालते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह रही कि बैंक प्रबंधन ने इस गंभीर आपराधिक मामले की जानकारी पुलिस को देने के बजाय इसे आपसी समझौते के जरिए ‘सेटल’ करने की कोशिश की।

रंगे हाथों पकड़ा गया जालसाज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक युवक बैंक में किसी अन्य व्यक्ति के खाते से पैसे निकालने की फिराक में था। संदेह होने पर बैंक कर्मचारियों ने उसे दबोच लिया। पूछताछ और जांच में पता चला कि यह वही जालसाज है जिसने पूर्व में भी इसी शाखा से दूसरे के खाते से ₹1,02,000 की अवैध निकासी की थी।
कर्मचारियों ने अपनी सैलरी से भरा था पैसा
पूर्व में जब एक लाख से अधिक की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था, तब बैंक की साख बचाने और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए कर्मचारियों ने कथित तौर पर अपनी सैलरी से उस राशि की भरपाई की थी। उस समय भी मामले को उच्चाधिकारियों या पुलिस तक नहीं पहुंचने दिया गया था।
मामला दबाने की कोशिश (लीपा-पोती)
आज फिर वही जालसाज गिरफ्त में आया, लेकिन बैंक मैनेजर ने पुलिस को सूचना देने के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की। घंटों बीत जाने के बाद भी स्थानीय पुलिस को इस घटना की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका
मीडिया कर्मियों के माध्यम से जब इस प्रकरण की जानकारी क्षेत्र अधिकारी (CO) को दी गई, तो उन्होंने संज्ञान लेने की बात कही, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी मौके पर कोई पुलिसकर्मी नहीं पहुंचा। आरोप है कि बैंक प्रबंधक ने पूरे मामले में ‘लीपा-पोती’ करते हुए आरोपी को बचाने या मामला रफा-दफा करने का प्रयास किया है।
मुख्य बिंदु:
स्थान: भारतीय स्टेट बैंक, मुख्य शाखा, मिश्र बाजार, गाजीपुर।
मामला: फर्जी तरीके से निकासी का प्रयास।
पिछला रिकॉर्ड: आरोपी पहले भी ₹1.02 लाख की चपत लगा चुका है।
विवाद: बैंक द्वारा पुलिस को सूचना न देकर आंतरिक समझौता करना।
इस घटना के बाद बैंक की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्राहकों के मन में अपनी जमा पूंजी की सुरक्षा को लेकर भी चिंता देखी जा रही है।
