रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। प्रदेश में पहली बार प्रस्तावित सनातन धर्म संसद आगामी हफ्ते गुरुवार से सात दिवसीय कार्यक्रम के रूप में शुरू होने जा रही है। आयोजन समिति से मिली जानकारी के अनुसार, हिंदू संघर्ष समिति सहित विभिन्न हिंदू संगठन इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियों में जुटे हुए हैं। आयोजक मंडल का कहना है कि देशभर से संत, विद्वान, धर्माचार्य, समाजसेवी, लेखक और विभिन्न राज्यों के संगठन इसमें शामिल होंगे।
हिंदू संघर्ष समिति के राष्ट्रीय संरक्षक रेशु ने बताया कि सनातन धर्म संसद का मुख्य उद्देश्य देश में उत्पन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक चुनौतियों पर मंथन करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सनातन परंपराओं और मूल्यों को समझना, सहेजना और समाज तक सही रूप में पहुँचाना समय की आवश्यकता है। आयोजन में राजपुरहित डॉ. सीताराम शास्त्री सहित अनेक प्रमुख विद्वान अपने विचार रखेंगे।
संत श्री चन्द्रमा महाराज ने कहा कि सनातन धर्म संसद देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि लगभग 38 हिंदू संगठनों ने इस कार्यक्रम को समर्थन दिया है और बड़ी संख्या में प्रतिनिधि विभिन्न राज्यों से मुजफ्फरनगर पहुँच रहे हैं। समिति के जिला अध्यक्ष अमित गुप्ता ने कहा कि देश को अराजकता से बचाने में सनातन धर्म की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम संयोजक अरुण प्रताप ने कहा कि आतंकवाद, सामाजिक विघटन और सांस्कृतिक संकट से देश को बचाने का मार्ग सनातन संस्कृति से ही संभव है। उन्होंने बताया कि संसद में सुरक्षा, शिक्षा, युवाओं में संस्कार निर्माण, नारी सम्मान, काउशल विकास, गौ–संरक्षण, राष्ट्रवाद और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर विशेष चर्चा होगी।
आयोजकों ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यक्रम पूर्णतः शांतिपूर्ण, धार्मिक तथा सामाजिक जागरूकता पर आधारित होगा। समापन रविवार को हवन और संचेतना यात्रा के साथ किया जाएगा।
