गुरु तेग बहादुर राष्ट्र रक्षक और महान संत थे– कृष्ण कुमार
गुरु तेग बहादुर ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया
रिपोर्ट – प्रदीप श्रीवास्तव

बहराइच। नवम गुरु श्री तेग बहादुर जी के 350 वां शहीदी पर्व श्रद्धा एवं सम्मान के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय राजेंद्र भवन पर मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश कर किया गया । उनकी स्मृति में गुरु ग्रंथ साहब का पाठ, सबद वाणी व कीर्तन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक कृष्ण कुमार ने कहा कि 17वीं सदी भारत के लिए काफी कठिन समय था औरंगजेब के शासन में धार्मिक कट्टरता और जबरन धर्मांतरण की घटनाएं बढ़ गई थी खासकर कश्मीर में उनके सूबेदार इस्तखार खान द्वारा हिंदुओं पर अत्याचार किए जा रहे थे।

हिंसा और जबरदस्ती धर्म परिवर्तन की कोशिशें से परेशान होकर कई कश्मीरी ब्राह्मण किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में थे जो उनकी रक्षा कर सके इन्हीं परिस्थितियों में 1675 में पंडित कृपाराम के नेतृत्व में एक समूह आनंदपुर साहिब पहुंचा उन्हें पता था की गुरु तेग बहादुर जी का दरबार हमेशा पीड़ितों और कमजोरों के लिए खुला रहता है गुरु साहब को लोग सिर्फ आध्यात्मिक गुरु ही नहीं बल्कि एक राष्ट्र रक्षक और मार्गदर्शक थे जब समाज के लोगों ने अपनी पीड़ा सुनाई तो सवाल उठा इन अत्याचारों के खिलाफ कौन होगा जवाब बहुत स्पष्ट है सबसे महान संत ही यह जिम्मेदारी उठा सकते हैं गुरु तेग बहादुर जी ने बिना झिझक इस जिम्मेदारी को स्वीकार किया और धर्म रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान दिया। गुरु तेग बहादुर साहिब जी का बलिदान बेहद स्पष्ट संदेश प्रेषित करता है सत्य के साथ खड़े रहो कमजोरों की रक्षा करो अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करो अपनी आस्था पर निष्ठ रहो और अन्य के सामने कभी न झुको।कार्यक्रम का संचालन गुरुद्वारा प्रबंध समिति के अध्यक्ष मनदीप वालिया व जिला कार्यवाह भूपेंद्र ने किया इस अवसर पर ज्ञानी विक्रम सिंह, सरदार जयदीप सिंह, सरदार फतेह सिंह, इंद्रपाल सिंह, गुरु सेवक सिंह, स्वप्निल, जसवीर सिंह,राम रोशन सिंह,जिला प्रचारक अजय, विभाग प्रचार प्रमुख अतुल, राष्ट्र सेविका समिति की सुनीता, निशा शर्मा,जिला प्रचार प्रमुख विपिन, सुनील, प्रदीप, धनंजय,अनुराग सहित सैकड़ो की संख्या में स्वयंसेवक बंधु उपस्थित है।
