रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। जैन कन्या पाठशाला पीजी कॉलेज में महिला प्रकोष्ठ के तत्वाधान में एकदिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें “नारी शक्ति वंदन अधिनियम—मातृशक्ति आक्रोश” विषय पर गहन मंथन हुआ। सेमिनार में महिला अधिकारों, राजनीतिक भागीदारी, सामाजिक सम्मान और सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर वक्ताओं ने बेबाक राय रखी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की प्राचार्य सीमा जैन ने की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल कानूनों के भरोसे नहीं, बल्कि समाज की सोच बदलकर वास्तविक सम्मान देना होगा। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति आज हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध कर चुकी है।
सेमिनार की समन्वयक डॉ. वर्चसा सैनी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी समाज और व्यवस्था दोनों की है। सहसमन्वयक डॉ. मनीषा अग्रवाल ने महिलाओं की शिक्षा और नेतृत्व क्षमता को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया।
कार्यक्रम सचिव डॉ. सविता वशिष्ठ ने कहा कि जब तक महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में बराबरी का अवसर नहीं मिलेगा, तब तक सच्चे अर्थों में विकास अधूरा रहेगा।
मुख्य अतिथि श्रीमती ममता अग्रवाल ने महिलाओं से आत्मनिर्भर बनने और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि समाज में संतुलन और प्रगति के लिए महिला सम्मान सबसे बड़ी आवश्यकता है।
सेमिनार में छात्राओं, शिक्षिकाओं और गणमान्य नागरिकों की सक्रिय भागीदारी रही। वक्ताओं के विचारों और छात्राओं के उत्साह ने कार्यक्रम को सार्थक बना दिया। आयोजन के अंत में महिला सशक्तिकरण के संकल्प के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

