रिपोर्ट – कबीर

मुजफ्फरनगर। नुमाइश मैदान में सोमवार को आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी के संयुक्त कार्यक्रम में उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई, जब मेरठ की सिवाल खास सीट से रालोद विधायक गुलाम मोहम्मद को शुरुआत में गेट पर ही रोक दिया गया। मामला बढ़ने पर आनन-फानन में उन्हें वापस बुलाकर मंच पर जगह देनी पड़ी।
बताया गया कि विधायक गुलाम मोहम्मद कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नुमाइश मैदान पहुंचे थे, लेकिन जैसे ही वे प्रवेश द्वार पर पहुंचे, वहां तैनात पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। मौके पर मौजूद एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने साफ कहा कि मंच और वीआईपी सूची में उनका नाम शामिल नहीं है, इसलिए उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
गेट पर रोक के बाद विधायक वहां से लौट गए, लेकिन जैसे ही यह खबर रालोद खेमे तक पहुंची, पार्टी में हड़कंप मच गया। गठबंधन के साझा कार्यक्रम में अपने ही विधायक को रोके जाने पर नेताओं ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे प्रोटोकॉल की बड़ी चूक करार दिया।
मामला तूल पकड़ता देख आयोजकों में भी खलबली मच गई। बताया जाता है कि राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल तक सूचना पहुंची, जिसके बाद तुरंत हस्तक्षेप किया गया। इसके बाद विधायक गुलाम मोहम्मद को फोन कर वापस बुलाया गया और उन्हें मंच पर सम्मानपूर्वक स्थान दिया गया।
हालांकि शुरुआती नाराजगी के बाद माहौल संभालने की कोशिश की गई, लेकिन यह घटनाक्रम पूरे कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा। भाजपा-रालोद गठबंधन के मंच से ही एक विधायक को पहले रोके जाने और फिर बुलाने की इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कार्यक्रम में बुढ़ाना से विधायक राजपाल बालियान, थानाभवन से विधायक अशरफ अली खान और रालोद के मंडल अध्यक्ष तिरस्पाल मलिक सहित दोनों दलों के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

