रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ्फरनगर। जनपद में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए गुरुवार को ताबड़तोड़ कार्रवाई की। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया के निर्देशन में उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय कुमार के नेतृत्व में नगरीय क्षेत्र में निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया गया, जिसमें चौंकाने वाली लापरवाहियां उजागर हुईं।
निरीक्षण के दौरान कुकड़ा रोड स्थित अलमासपुर चौक के पास संचालित जीवन दाता हॉस्पिटल पूरी तरह अपंजीकृत मिला। अस्पताल में न तो कोई पंजीकृत चिकित्सक मौजूद था और न ही आवश्यक अभिलेख उपलब्ध थे। मरीजों की जान के साथ खुलेआम खिलवाड़ होते देख स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

इसके बाद टीम ने अपेक्स हॉस्पिटल का निरीक्षण किया, जहां सात मासूम बच्चे भर्ती पाए गए। जांच में सामने आया कि पंजीकृत चिकित्सक डॉ. अभिषेक यादव बीते एक अप्रैल से अस्पताल नहीं आए थे। इतना ही नहीं, अस्पताल में कोई पंजीकृत बाल रोग विशेषज्ञ भी उपलब्ध नहीं था और छह अप्रैल के बाद से किसी विशेषज्ञ द्वारा बच्चों की विजिट तक नहीं की गई। बिना डॉक्टर की निगरानी के बच्चों का भर्ती होना स्वास्थ्य मानकों की गंभीर अनदेखी मानी गई।
इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए अपेक्स हॉस्पिटल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि भर्ती सभी बच्चों को तत्काल किसी मान्यता प्राप्त अस्पताल में शिफ्ट कराया जाए, ताकि उनका समुचित इलाज सुनिश्चित हो सके।
उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय कुमार ने स्पष्ट किया कि जनपद में अवैध अस्पतालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है और नियमों से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से अवैध रूप से संचालित अस्पतालों में खलबली मच गई है।

