रिपोर्ट – कबीर

मुज़फ्फरनगर। पॉलिटिकल जस्टिस पार्टी के पदाधिकारियों ने प्रदेश में वाल्मीकि समाज के बढ़ते पलायन और सफाई कर्मचारियों के शोषण का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन भेजकर स्थायी रोजगार की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि रोजगार के अभाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से वाल्मीकि समाज के लोग बड़ी संख्या में चंडीगढ़ और लुधियाना जैसे शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
पॉलिटिकल जस्टिस पार्टी के जिलाध्यक्ष अश्वनी कुमार वाल्मीकि के नेतृत्व में भेजे गए ज्ञापन में बताया गया कि सहारनपुर, मुज़फ्फरनगर और शामली जैसे जिलों के अनेक गांवों में पहले वाल्मीकि समाज के 100 से 150 घर हुआ करते थे, लेकिन अब वहां केवल चार से पांच घर ही बचे हैं। अधिकांश परिवार रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों और बड़े शहरों में बस चुके हैं।
पार्टी पदाधिकारियों का आरोप है कि प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में हजारों पद खाली होने के बावजूद उन्हें स्थायी रूप से नहीं भरा जा रहा है। चीनी मिल, परिवहन विभाग, आबकारी विभाग, जीएसटी, तहसील, रोडवेज, डीएम और एसएसपी कार्यालय, पुलिस थाने, सिंचाई, गन्ना, समाज कल्याण, पीडब्ल्यूडी, बिजली विभाग, शिक्षण संस्थानों और नगर निकायों में सफाई कर्मचारियों के कई पद रिक्त पड़े हैं। इसके बावजूद सफाई कार्य ठेकेदारी या संविदा कर्मचारियों से कराया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों को कम वेतन में काम करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में कहा गया कि ठेकेदारी और संविदा व्यवस्था में कार्यरत सफाई कर्मियों को क्रमशः करीब 9500 से 22000 रुपये तक वेतन मिलता है, जो बढ़ती महंगाई में परिवार चलाने के लिए बेहद कम है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
पार्टी नेताओं ने नगर पालिका परिषद मुज़फ्फरनगर का उदाहरण देते हुए बताया कि करीब सात लाख तीस हजार की आबादी वाले शहर में मानकों के अनुसार लगभग 3500 सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में स्थायी, संविदा और ठेकेदारी मिलाकर करीब 970 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। इससे कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ने के साथ उनका शोषण भी हो रहा है।
पॉलिटिकल जस्टिस पार्टी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश के सभी विभागों में रिक्त पड़े सफाई कर्मचारियों के पदों को स्थायी रूप से भरा जाए और ठेकेदारी तथा संविदा व्यवस्था को समाप्त किया जाए। साथ ही निजी स्कूलों, अस्पतालों और फैक्ट्रियों में कार्यरत सफाई कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 30 हजार रुपये मासिक वेतन निर्धारित करने का भी अनुरोध किया गया है।
ज्ञापन भेजने वालों में नरेश नंदनवाल, मनोज कुमार, रितिक, मोहन समेत पॉलिटिकल जस्टिस पार्टी की जिला इकाई के कई पदाधिकारी शामिल रहे।

