रिपोर्ट सुभाष मण्डल/मुर्शिदाबाद/पश्चिम बंगाल
लादाख की बर्फीली वादियों में कर्तव्य पथ पर हृदय रोग से अमरत्व प्राप्त कर गए भारतीय सेना के वीर जवान मनीरुल इस्लाम। पिछले शुक्रवार संध्या को अस्पताल में चिकित्साधीन अवस्था में उन्होंने अंतिम सांस ली। रविवार प्रभात में भारतीय सेना के वाहन द्वारा उनका पार्थिव शरीर शेखपाड़ा के पारिवारिक निवास पर पहुंचाया गया। वाहन के अग्रभाग पर स्पष्ट शिलालेख था— “BRAVEHEART OF 22 MAHAR”, जो महार रेजिमेंट की 22वीं बटालियन के अदम्य साहसी योद्धा के रूप में उनकी गरिमापूर्ण पहचान को उजागर करता है। महार रेजिमेंट भारतीय थलसेना की प्राचीन एवं गौरवशाली पैदल रेजिमेंट है।
परिवारजनों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, महार रेजिमेंट की 22वीं बटालियन के साहसी जवान मनीरुल इस्लाम लादाख में माइनस चार डिग्री के तापमान में ड्यूटी पर तैनात थे। अचानक अस्वस्थ्य हो पड़ने पर उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती किया गया, किंतु चिकित्सक अंततः उन्हें बचा न सके। मृत्यु सूचना घर पहुंचते ही परिवार के सदस्य विगलित हो उठे। समूचे क्षेत्र पर शोक का काला बादल मंडराने लगा।
रविवार को प्रियजनों को अंतिम दर्शन के लिए शेखपाड़ा में सैलाब उमड़ पड़ा। देशरक्षा में आत्मोत्सर्ग करने वाले इस वीर को अंतिम सम्मान के रूप में सेना द्वारा गन सल्यूट प्रदान किया जाएगा।
परिवारजन इस आकस्मिक विदाई को कदापि स्वीकार करने को तैयार नहीं। घर में पत्नी एवं छोटे-छोटे बालक-बालिकाएं हैं। उनके भविष्य की चिंता में परिवार अब दिशाहीन हो चुका है।एक साहसी जवान के असामयिक अवसान पर शेखपाड़ा शोकमग्न। कर्तव्यभक्ति में जीवन समर्पित कर अंतिम निःश्वास तक राष्ट्रसेवा निभाने वाले मनीरुल इस्लाम की स्मृति चिरकाल तक अक्षय रहेगी, ऐसा विश्वास व्यक्त किया स्थानीय निवासियों ने।



