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ऑपरेशन में छोड़ी ड्रिल की स्टील बीट, महिला का पैर काटने तक का खतरा; निजी नर्सिंग होम पर गंभीर आरोप

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रिपोर्ट – कबीर


मुज़फ्फरनगर। जनपद में निजी नर्सिंग होम की लापरवाही का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें ऑपरेशन के दौरान मरीज के पैर में ड्रिल मशीन की स्टील बीट छोड़े जाने का आरोप लगा है। पीड़ित परिवार का कहना है कि महीनों तक दर्द और संक्रमण से जूझने के बाद अब महिला का पैर काटने की नौबत आ गई है। मामले को लेकर जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और रजिस्ट्रेशन निरस्त करने की मांग की गई है।
शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बरवाला निवासी याकूब पुत्र इकबाल ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उसकी पत्नी सलमा (43 वर्ष) 13 मई 2025 को घर में फिसलकर गिर गई थी, जिससे उसके बाएं पैर में घुटने के ऊपर जांघ की हड्डी टूट गई। इलाज के लिए सलमा को जानसठ हाउस अंसारी रोड स्थित जमील नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, जहां 14 मई 2025 को ऑपरेशन कर हड्डी में स्टील की प्लेट डाली गई।
आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर की घोर लापरवाही से ड्रिल मशीन की स्टील बीट पैर के अंदर ही छूट गई। इसके बाद दर्द की शिकायत पर डॉक्टर द्वारा केवल दवाइयां देकर लगातार आश्वासन दिया जाता रहा। पीड़ित के अनुसार करीब 7–8 महीनों में हजारों रुपये की दवाइयां दी गईं, लेकिन न तो दर्द कम हुआ और न ही स्थिति में सुधार आया।
करीब 15 दिन पहले सलमा को मेरठ रोड स्थित संतोष हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां जांच और एक्स-रे के बाद डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन के समय छोड़ी गई स्टील बीट के कारण पैर में लगातार संक्रमण (सेप्टिक) बन रहा है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि यदि तत्काल दोबारा ऑपरेशन नहीं किया गया तो संक्रमण फैल सकता है और पैर काटना भी पड़ सकता है।
पीड़ित याकूब का आरोप है कि जब वह दोबारा जमील नर्सिंग होम पहुंचा और लापरवाही की बात उठाई तो डॉक्टर ने दोबारा ऑपरेशन के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये की मांग कर दी। खर्च उठाने में असमर्थता जताने और शिकायत की बात कहने पर डॉक्टर ने कथित तौर पर ऑपरेशन से इनकार करते हुए एम्स या पीजीआई ले जाने की सलाह दे दी।
गरीब मजदूर याकूब का कहना है कि डॉक्टर की लापरवाही ने उसकी पत्नी को अपंगता के कगार पर पहुंचा दिया है। उसने प्रशासन से आरोपी डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई करने और नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन निरस्त करने की मांग की है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है टीम गठित कर दी गई है और जांच आने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उन पर कार्रवाई की जाएगी।

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