Homeराष्ट्रीयनर्मदा तट पर अपनी कल्पना को साकार रूप दे रहे चित्रकार

नर्मदा तट पर अपनी कल्पना को साकार रूप दे रहे चित्रकार

संवाददाता -भूनेश्वर केवट
लोकेशन -मंडला मप्र

रज़ा स्मृति में पेंटिंग को लेकर दिख रही है दीवानगी

झंकार भवन में आज होगी शायरी, कविता और कबीर गायन

मंडला – रविवार को विश्व प्रसिद्ध चित्रकार सैयद हैदर रज़ा की स्मृति में रज़ा फाउंडेशन नई दिल्ली द्वारा आयोजित रज़ा स्मृति – 2024 के दूसरे दिन बड़ी संख्या में लोग रज़ा कला विथिका में चित्रकारी करने पहुंचे। चित्रकारी करने वालों में बच्चों से लेकर हर उम्र के लोग शामिल थे। गमले और छातों में पेंट करने को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह नजर आए और बड़ी संख्या में महिलाओं ने गमले और छातों में पेंटिंग की। इसके अलावा माटी के रंग के तहत आयोजित कार्यशाला में मिट्टी की चीजे बनाना सिखाई जा रही है, जिसमें हर वर्ग के लोग शामिल हुए और उन्होंने अपने हाथों से मिट्टी की चीजे बनाना सीखा। इसके अलावा रपटा घाट में चल रही चित्रकला कार्यशाला में मध्य प्रदेश के 10 चुनिंदा कलाकार अपनी कल्पना को साकार रूप दे रहे हैं। कार्यशाला के चित्रकारों का कहना है कि नर्मदा तट पर चित्रकारी करना एक अनोखा अनुभव है, इसमें एक खास अनुभूति हो रही है जो इससे पहले कहीं महसूस नहीं हुई। रज़ा स्मृति के कलाकारों द्वारा रपटा घाट में वरिष्ठ चित्रकार श्री अखिलेश का सम्मान कर गुरु पूर्णिमा भी मनाई गई।

रज़ा स्मृति – 2024 के संयोजक व वरिष्ठ चित्रकार श्री अखिलेश ने बताया कि मध्य प्रदेश के मंडला के रज़ा साहब ने यहां रहकर प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की थी और नर्मदा किनारे उनका अपना शुरुआती जीवन गुजारा है। यहां से प्राथमिक शिक्षा लेने के बाद वे दमोह चले गए फिर उसके बाद फ्रांस में लगभग 60 साल रहने के बाद वापस अपने देश लौटे। उनकी मंशा थी कि मंडला में उनके पिता की कब्र है तो मुझे यहां नर्मदा जी के किनारे दफनाया जाए। तब से मंडला में 5 दिन – 4 दिन का कार्यक्रम रज़ा फाउंडेशन आयोजित करता है, जिसमें कविता, नृत्य, संगीता, चित्रकला इन सभी को शामिल करते हैं। रज़ा साहब की बड़ी अच्छी बात थी जो बहुत सारे चित्रकारों में नहीं दिखाई देती वो यह कि वे हर कला के बारे में जानते थे, उनको अन्य कलाओं का भी उतना ही ज्ञान था जितना अपनी चित्रकला में था। तो इस तरह से यह एक तरह का ट्रिब्यूट भी है। सारी कलाओं के प्रोग्राम यहां पर होते है। रज़ा फाउंडेशन बीच में एक माह के वर्कशॉप भी करता है जिसमें कोई गुरु आकर डांस सिखाता है, कोई संगीतकार संगीत सिखाता है, कोई चित्रकार चित्रकारी सिखाता है। इस तरह से भी व्यक्ति को अपने देश की संस्कृति, सभ्यता के बारे में पता चलता है और वह इससे जुड़ते हैं। इस तरह से मंडला के कलाकारों का बाहरी कलाकारों से और बाहरी कलाकारों का संबंध मंडला के कलाकारों से स्थापित हो रहा है।

रज़ा कला वीथिका के बाद अतिथियों ने रपटा घाट में आयोजित चित्रकला कार्यशाला में नर्मदा तट पर चित्रकारी कर रहे मेहमान कलाकार रजनी भोसले, प्रीति मान, रिव्या बकुत्रा, पूर्वी शुक्ल, अनूप श्रीवास्तव, सनी मालवतकर, दीपक कुमार श्याम, आत्माराम श्याम, हरिओम पाटीदार और प्रभात जोशी अपनी कल्पना को केनवास पर साकार रूप देने में जुटे हुए है। कलाकार पूर्वी शुक्ला ने बताया कि मैं कटनी मध्य प्रदेश से रज़ा फाउंडेशन के कार्यक्रम में शामिल होने का मेरा पहला अवसर है। इसके पहले में मंडला कभी नहीं आई हूं। वैसे मेरा घर मंडला से बहुत पास है लेकिन कभी मौका नहीं मिला। इस बार जब हम रज़ा स्मृति में आए हैं तो उसके लिए मैं फाउंडेशन का शुक्रिया अदा करती हूं कि उन्होंने मुझे मौका दिया। हम सभी आर्टिस्ट साथ में रह रहे हैं, एक दूसरे का काम देख सीख रहे हैं। यहां नर्मदा तट पर पेंटिंग कर रहे हैं। यह मेरे लिए पहला मौका है, इसके पहले मैंने कभी इतनी प्राकृतिक जगह पर बैठकर काम नहीं किया है। एक आर्टिस्ट के लिए नेचर से जुड़े रहना बहुत बड़ी बात है और मेरा काम भी नेचर से ही रिलेटेड है। मैं घाट को दर्शा रही हूं। धार से आए अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि रज़ा स्मृति में हमारी प्रदर्शनी भी लगी है और आर्ट कैंप भी चल रहा है। इसमें मैंने नर्मदा परिक्रमा से प्रभावित होकर चित्र बनाया है और इसकी प्रेरणा मुझे नर्मदा घाट से ही मिली है।

रज़ा स्मृति में शामिल होने पहुंची त्रिवेणी पटेल ने कहा कि आज गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष में कुछ अच्छा करने को मौका मिला। मैंने मिट्टी से बहुत ही अच्छी चीज बनाई। मिट्टी को अपने हाथ में लेकर उसे जो आकार देना चाहा दिया। इससे मैंने बहुत अच्छा अनुभव किया। यहां आकर मुझे बहुत खुशी हुई। यहां पर देख रहे हैं कि सभी बच्चे पेंटिंग कर रहे हैं जिससे बहुत अच्छा लग रहा है।

अर्शनी विश्वकर्मा कि हर साल रज़ा फाउंडेशन द्वारा आयोजन कराया जाता है, जिसमें बड़े – छोटे सब एक साथ बैठकर पेंटिंग करते हैं। सब लोग अलग-अलग तरह की पेंटिंग करते हैं। कोई ड्राइंग शीट में पेंटिंग करता है, कोई छाता पेंट करता है, कोई गमला पेंट करता है। हमें इसका इंतजार रहता है और हम हर वर्ष रज़ा स्मृति स्मृति में सहभागी बनते हैं।

रज़ा स्मृति – 2024 की सांस्कृतिक संध्या का आयोजन झंकार भवन में किया जा रहा है। रज़ा स्मृति के तीसरे दिन रविवार की शाम 22 जुलाई की शाम 6:00 बजे हिंदी उर्दू कविता पाठ होगा। इस काव्य पाठ में सुशीला पुरी, जोशन बनर्जी आडवानी, अमरदीप सिंह और कमर अब्बास अपने काव्य पाठ करेंगे। कार्यक्रम का समापन कबीर गायन से होगा। इसमें प्रसिद्ध कबीर गायक भैरू सिंह चौहान अपने साथियों के साथ प्रस्तुति देंगे। रज़ा फाउंडेशन के सदस्य सचिव संजीव चौबे ने सभी कला प्रेमियों से रज़ा स्मृति के विभिन्न आयोजनों में शामिल होने की अपील की है।

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