रिपोर्ट – कबीर
मुजफ्फरनगर। रुड़की रोड स्थित निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई एक बार फिर शुरू हुई है। शनिवार को टीम ने क्षेत्र के निजी अस्पतालों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं और जरूरी मानकों की जांच की। कार्रवाई के बाद अब सवाल पिछली कार्रवाई के नतीजों पर भी उठ रहे हैं। पहले भी कई अस्पतालों में खामियां मिलने पर नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन कुछ समय बाद इनके दोबारा संचालित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी अस्पताल में इतनी गंभीर कमियां थीं कि उसे सील करना पड़ा, तो बाद में उसे खोलने की अनुमति किन शर्तों पर दी गई। क्या अस्पताल संचालकों ने सभी कमियां दूर कर दी थीं? क्या सील हटाने से पहले विभाग ने दोबारा निरीक्षण कर मानकों की जांच की थी? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना अभी बाकी है।
छापेमारी के बाद फॉलोअप पर रहेगी नजर
रुड़की रोड क्षेत्र में निजी अस्पतालों पर पहले भी कार्रवाई हुई है। निरीक्षण के दौरान पंजीकरण, चिकित्सकीय व्यवस्थाओं, जरूरी संसाधनों और अन्य मानकों से जुड़ी कमियां सामने आने पर विभाग ने कार्रवाई की थी। इसके बावजूद यदि वही संस्थान बाद में फिर पुराने ढर्रे पर चलते मिलते हैं तो निगरानी और अनुपालन व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से भी यह मामला महत्वपूर्ण है। निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीज और उनके परिजन विभागीय निगरानी को भरोसे की व्यवस्था मानते हैं। ऐसे में कार्रवाई के बाद कमियां वास्तव में दूर हुईं या नहीं, इसका नियमित सत्यापन जरूरी है।
शनिवार की कार्रवाई के बाद अब यह देखना अहम होगा कि स्वास्थ्य विभाग केवल निरीक्षण और नोटिस तक सीमित रहता है या पिछली कार्रवाई का भी पूरा फॉलोअप करता है। विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पूर्व में किन अस्पतालों पर क्या कार्रवाई हुई, किन कारणों से सीलिंग की गई और बाद में संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई।
यदि दोबारा जांच में नियमों का उल्लंघन मिलता है तो कार्रवाई के साथ उसकी निरंतर निगरानी भी जरूरी होगी। अब सवाल सिर्फ छापेमारी का नहीं, कार्रवाई के बाद व्यवस्था में स्थायी सुधार का है।
