रिपोर्ट – संदीप वर्मा
बाराबंकी। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार एवं प्रतिमा श्रीवास्तव, जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाराबंकी के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाराबंकी एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग, बाराबंकी के संयुक्त तत्वावधान में आज 24.09.2026 को पीएमश्री राजकीय इण्टर कालेज, बाराबंकी स्थित हॉल में पाक्सो अधिनियम, 2012 के प्रावधानों, बच्चों के अधिकारों एवं उनके संरक्षण के संबंध में जागरूकता हेतु कार्यशाला का आयोजन उज्ज्वल उपाध्याय, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाराबंकी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यशाला में जनपद के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य/प्रधानाचार्या एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे।
उज्ज्वल उपाध्याय, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाराबंकी द्वारा बताया गया कि प्रत्येक व्यक्ति जीवनभर सीखने की प्रक्रिया में रहता है। हम अपने से वरिष्ठ एवं कनिष्ठ व्यक्तियों से निरंतर कुछ न कुछ सीखते हैं तथा अपने अनुभवों को आगे आने वाली पीढ़ी के साथ साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं उनके सुरक्षित भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अतः विद्यालयों में बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श, लैंगिक अपराधों से बचाव तथा किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक अथवा संदिग्ध परिस्थिति में तत्काल अपने अभिभावक, शिक्षक अथवा संबंधित प्राधिकारी को जानकारी देने के लिए जागरूक किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने पाक्सो अधिनियम, 2012 के अंतर्गत बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण प्रदान किए जाने, अपराध की सूचना दिए जाने की प्रक्रिया तथा विधि के अंतर्गत निर्धारित प्रावधानों के संबंध में जानकारी प्रदान की। उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों से अपेक्षा की कि वे अपने-अपने विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रहते हुए पाक्सो अधिनियम के प्रावधानों के संबंध में नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें तथा किसी भी संदिग्ध अथवा आपत्तिजनक घटना की जानकारी प्राप्त होने पर नियमानुसार तत्काल आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें।
राधेश्याम धीमान, प्रधानाचार्य, राजकीय इण्टर कालेज द्वारा अपने संबोधन में विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण के प्रति शिक्षकों की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों के साथ निरंतर संपर्क में रहते हैं, इसलिए बच्चों के व्यवहार में होने वाले असामान्य परिवर्तन अथवा किसी प्रकार की समस्या को पहचानकर समय रहते आवश्यक सहायता एवं मार्गदर्शन प्रदान करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने पाक्सो अधिनियम, 2012 के प्रावधानों के प्रति विद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को जागरूक किए जाने पर बल दिया।
नंदिता, नोडल अधिकारी/प्रधानाचार्या, राजकीय बालिका इण्टर कालेज द्वारा बालिकाओं की सुरक्षा, उनके अधिकारों तथा विद्यालय में सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए गए। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को उनके अधिकारों, गुड टच-बैड टच तथा किसी भी अनुचित व्यवहार के संबंध में जागरूक किया जाना आवश्यक है, जिससे वे किसी भी असहज अथवा संदिग्ध परिस्थिति में बिना संकोच अपने अभिभावक अथवा शिक्षक को इसकी जानकारी दे सकें। उन्होंने विद्यालय स्तर पर बालिकाओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक सतर्कता एवं संवेदनशीलता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
संजीव सोनकर द्वारा बच्चों के विरुद्ध होने वाले लैंगिक अपराधों एवं मानव तस्करी से संबंधित मामलों में बरती जाने वाली सावधानियों, बच्चों की सुरक्षा तथा अपराध की सूचना समय से संबंधित अधिकारियों को दिए जाने के महत्व के बारे में बताया गया।
सुश्री रत्ना कुमार, प्रभारी निरीक्षक, महिला थाना द्वारा पाक्सो अधिनियम के अंतर्गत पुलिस की भूमिका, अपराध की सूचना प्राप्त होने पर की जाने वाली कार्यवाही तथा बालिकाओं की सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने विद्यालय स्तर पर बच्चों के साथ संवेदनशील एवं सुरक्षित वातावरण बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन सुशील कुमार दुबे द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यक्रम का संचालन करते हुए उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा कार्यशाला के उद्देश्य एवं विषय-वस्तु से अवगत कराया।
इस अवसर पर अरविन्द प्रकाश त्रिपाठी उपप्रधानाचार्य राजकीय इण्टर कालेज समेत जनपद के कई विद्यालयो के प्रधानाचार्य, छात्र तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से कनिष्ठ लिपिक लवकुश कनौजिया, सौरभ शुक्ला व पीएलवी सद्दाम उपस्थित रहे।
