रिपोर्ट कबीर
मुजफ्फरनगर। चरथावल विधानसभा क्षेत्र में संभावित चुनावी गतिविधियों के बीच राजनीतिक और सामाजिक बयानबाजी तेज हो गई है। योग साधना आश्रम के संस्थापक स्वामी यशवीर महाराज के हालिया बयानों को लेकर राष्ट्रीय त्यागी भूमिहार ब्राह्मण समाज समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी मांगेराम त्यागी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले बयान समाज में विभाजन और आपसी तनाव को बढ़ावा दे सकते हैं।
चौधरी मांगेराम त्यागी ने कहा कि किसी समुदाय के कुछ व्यक्तियों के कार्यों के आधार पर पूरे समाज को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, इस प्रकार की बयानबाजी सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी यशवीर महाराज के लगातार दिए जा रहे बयानों से मुस्लिम समुदाय को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जिससे सामाजिक समरसता प्रभावित होने की आशंका है। त्यागी का यह भी दावा है कि स्वामी यशवीर चरथावल विधानसभा क्षेत्र से चुनावी राजनीति में सक्रिय भूमिका की तैयारी कर रहे हैं और इसी कारण ऐसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
चौधरी मांगेराम त्यागी ने कहा कि लोकतंत्र में समाज को जोड़ने वाली राजनीति को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जबकि धार्मिक ध्रुवीकरण से सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने मुस्लिम समुदाय के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के विकास, शिक्षा, विज्ञान और प्रशासनिक क्षेत्रों में इस समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी एक घटना या व्यक्ति के आधार पर पूरे समुदाय का आकलन नहीं किया जाना चाहिए।
इस दौरान उन्होंने किसानों के मुद्दों को भी उठाते हुए कहा कि किसानों की वास्तविक समस्याएं लगातार पीछे छूटती जा रही हैं। उनके अनुसार, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को किसानों की समस्याओं और जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
शामली के चर्चित धर्मांतरण प्रकरण का जिक्र करते हुए उन्होंने आयुष मलिक मामले में निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की। उनका कहना था कि पीड़ित पक्ष और स्थानीय लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए।
समाचार लिखे जाने तक इस पूरे मामले पर स्वामी यशवीर महाराज अथवा उनके प्रतिनिधियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में यह मुद्दा अब राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
