रिपोर्ट: शमशाद आलम
जालौन में मौसम की मार से किसानों की बढ़ी परेशानी
उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद में अचानक आए आंधी-तूफान और तेज बारिश ने एक बार फिर किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। खेतों से अपनी उपज को सुरक्षित मंडी तक पहुंचाने वाले किसानों को उम्मीद थी कि उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलेगा, लेकिन मौसम के बदले मिजाज ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। मंडी परिसर में खुले स्थानों पर रखी मूंग की बड़ी मात्रा बारिश की चपेट में आ गई, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बारिश के दौरान मंडी में रखी कई बोरियां पूरी तरह भीग गईं, जबकि कुछ बोरियां आधी तक पानी में डूबी रहीं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए होते तो उनकी उपज को बचाया जा सकता था। इस घटना के बाद किसानों में नाराजगी देखी जा रही है और उन्होंने प्रशासन से नुकसान की भरपाई की मांग की है।
मूंग की फसल को हुआ बड़ा नुकसान
जानकारी के अनुसार, जालौन मंडी में कई किसान अपनी मूंग की फसल लेकर बिक्री के लिए पहुंचे थे। खरीद प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं के बीच फसल मंडी परिसर में रखी हुई थी। इसी दौरान तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई।
बारिश इतनी तेज थी कि कुछ ही देर में मंडी परिसर के कई हिस्सों में पानी भर गया। खुले में रखी मूंग की बोरियां भीग गईं और कई स्थानों पर पानी जमा होने से फसल को नुकसान पहुंचा। किसानों का कहना है कि भीगी हुई मूंग की गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है, जिससे बाजार में उसका मूल्य कम हो जाता है। कई बार व्यापारी ऐसी उपज को कम कीमत पर खरीदते हैं या खरीदने से भी इनकार कर देते हैं।
किसानों ने मंडी प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
घटना के बाद किसानों ने मंडी प्रशासन और संबंधित अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि मौसम विभाग द्वारा पहले से बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई जा रही थी, इसके बावजूद मंडी में पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए।
किसानों के अनुसार, मंडी परिसर में फसल को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल की व्यवस्था नहीं की गई। बारिश शुरू होने के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। किसानों ने आरोप लगाया कि यदि समय पर आवश्यक कदम उठाए जाते तो फसल को नुकसान से बचाया जा सकता था।
कई किसानों ने कहा कि वे अपनी उपज को लेकर घंटों तक परेशान रहे, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली। ऐसे में उनकी मेहनत और लागत दोनों पर संकट खड़ा हो गया है।
लाखों रुपये के नुकसान की आशंका
मंडी में मौजूद किसानों का अनुमान है कि इस घटना से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। मूंग की फसल तैयार करने में किसानों को बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर काफी खर्च करना पड़ता है। ऐसे में मंडी तक पहुंचने के बाद यदि फसल खराब हो जाए तो किसानों के लिए आर्थिक संकट और गहरा हो जाता है।
किसानों का कहना है कि पहले ही कृषि लागत लगातार बढ़ रही है। ऊपर से प्राकृतिक आपदाएं और व्यवस्थागत कमियां उनकी परेशानियों को और बढ़ा रही हैं। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने उधार लेकर खेती की थी और अब नुकसान की स्थिति में ऋण चुकाना भी मुश्किल हो सकता है।
मंडी में सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
इस घटना के बाद मंडी परिसर में मौजूद व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि मंडियों में फसल सुरक्षा के लिए स्थायी इंतजाम होने चाहिए। बरसात या खराब मौसम की स्थिति में किसानों की उपज को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त शेड, गोदाम और तिरपाल उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि कृषि उपज मंडियों में मौसम संबंधी जोखिमों को कम करने के लिए आधुनिक सुविधाओं की आवश्यकता है। यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए तो किसानों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
किसानों ने की मुआवजे की मांग
नुकसान से परेशान किसानों ने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि उनकी फसल बारिश के कारण खराब हुई है, इसलिए नुकसान का आकलन कर आर्थिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
कई किसानों ने यह भी मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मंडी प्रशासन की जिम्मेदारी तय की जाए और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि यदि व्यवस्थाएं मजबूत होंगी तो किसानों की उपज सुरक्षित रहेगी और उन्हें अनावश्यक नुकसान का सामना नहीं करना पड़ेगा।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
घटना के बाद किसानों की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। प्रभावित किसान चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी मंडी पहुंचकर स्थिति का जायजा लें और नुकसान का वास्तविक आकलन करें। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ भी आवश्यक कार्रवाई की जाए।
फिलहाल जालौन मंडी में हुई इस घटना ने किसानों की समस्याओं को एक बार फिर सामने ला दिया है। मौसम की मार और व्यवस्थागत कमियों के बीच किसान अपनी मेहनत की फसल को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन किसानों की मांगों पर कितना गंभीर रुख अपनाता है और उन्हें राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
रिपोर्ट: शमशाद आलम
स्थान: जालौन, उत्तर प्रदेश
निष्पक्ष रिपोर्टर
