रिपोर्टर : मोहम्मद नसीम
लोकेशन : बाराबंकी
बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ क्षेत्र में रविवार को ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आगमन पर श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक वातावरण का अनूठा संगम देखने को मिला। उनके स्वागत के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। समर्थकों ने माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे क्षेत्र में धार्मिक जयघोष गूंजते रहे, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
शंकराचार्य के स्वागत समारोह में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक राममगन रावत, सपा नेता गौतम रावत, कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया सहित अनेक जनप्रतिनिधि और सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने उनका सम्मान करते हुए सनातन परंपरा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के प्रति उनके प्रयासों की सराहना की।
श्रद्धालुओं ने किया भव्य स्वागत
हैदरगढ़ पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का पुष्प वर्षा और माल्यार्पण के साथ स्वागत किया। लोगों ने उनके दर्शन कर आशीर्वाद लिया और धार्मिक नारों के बीच कार्यक्रम स्थल का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण थी कि उनके प्रति लोगों में गहरी आस्था है।
कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
गौतौना स्थित आवास पर पहुंचे शंकराचार्य
स्वागत कार्यक्रम के बाद शंकराचार्य गौतौना स्थित समाजवादी पार्टी के नेता गौतम रावत के आवास पहुंचे। यहां गौतम रावत ने उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर अनेक स्थानीय नागरिक और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। सभी ने शंकराचार्य का सम्मान करते हुए उनका स्वागत किया।
इसके बाद आयोजित सभा में शंकराचार्य ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और गौ संरक्षण के महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे।
गौ माता को दर्जा देने की उठाई मांग
सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का अभिन्न आधार है। उन्होंने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और उसे उचित सम्मान मिलना चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि गाय को सामान्य पशु की श्रेणी से अलग कर आधिकारिक रूप से “गौ माता” का दर्जा दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यह केवल धार्मिक भावना का विषय नहीं बल्कि भारतीय परंपरा, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
संघर्ष जारी रखने का किया ऐलान
शंकराचार्य ने कहा कि जब तक उनकी यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक उनका अभियान और संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से पूछा कि क्या वे इस आंदोलन में उनके साथ खड़े रहेंगे। इस पर सभा में मौजूद लोगों ने हाथ उठाकर और जयघोष के साथ अपना समर्थन व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से ही इस अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा और जनजागरण के माध्यम से लोगों को इस विषय के प्रति जागरूक किया जाएगा।
सरकार से की अपील
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने कहा कि जो सरकार स्वयं को हिंदुत्व और भारतीय संस्कृति की समर्थक बताती है, उसे गौ माता के सम्मान से जुड़े इस विषय पर सकारात्मक पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह विषय किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आपसी सद्भाव बनाए रखने और भारतीय परंपराओं के संरक्षण में सहयोग करने की भी अपील की।
जनप्रतिनिधियों ने जताया सम्मान
कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शंकराचार्य के विचारों का सम्मान करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए ऐसे संवाद समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं। उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम के शांतिपूर्ण और अनुशासित आयोजन की सराहना की।
सभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य से आशीर्वाद प्राप्त किया और उनके दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना की। पूरे कार्यक्रम का समापन शांतिपूर्ण, श्रद्धापूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ।
