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बांदा में अवैध खनन को लेकर सियासत तेज, रसूखदारों पर लगे गंभीर आरोप

रिपोर्ट: शुभम सिंह

बांदा जिले में इन दिनों अवैध खनन का मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। नदियों का सीना चीरकर कथित रूप से चल रहे खनन कारोबार को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

 

स्थानीय स्तर पर यह मामला इतना चर्चित हो चुका है कि चुनावी चर्चाओं से ज्यादा अवैध खनन को लेकर बहस होती दिखाई दे रही है।

 

सियासत के केंद्र में खनन का मुद्दा

 

एक ओर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav सरकार को खनन के मुद्दे पर घेरते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जनपद में कुछ स्थानीय नेताओं पर खनन कारोबार से जुड़े होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

 

सूत्रों के अनुसार पैलानी और बबेरू तहसील क्षेत्र की कुछ खदानों में प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

 

खदान संचालन को लेकर उठे सवाल

 

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक पैलानी क्षेत्र के साड़ी खंड 77 और बबेरू क्षेत्र के मरका खंड 3 में खनन संचालन को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

 

लोगों का आरोप है कि कथित रूप से नियमों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर खनन कार्य किया जा रहा है।

 

क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि दिन-रात भारी मशीनों और ओवरलोड वाहनों का संचालन जारी रहता है, जिससे पर्यावरण और सड़कों दोनों को नुकसान पहुंच रहा है।

 

प्रतिबंधित मशीनों के इस्तेमाल का आरोप

 

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कई स्थानों पर प्रतिबंधित पोकलैंड मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

इसके साथ ही ओवरलोड ट्रकों की आवाजाही से ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्घटनाओं और सड़क क्षति की समस्या भी बढ़ रही है।

 

अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल

 

मामले को लेकर खनिज विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

 

लोगों का आरोप है कि कथित मिलीभगत और प्रशासनिक ढिलाई के कारण अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।

 

हालांकि प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

 

कार्रवाई की मांग तेज

 

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने अवैध खनन की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

 

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो पर्यावरण और सरकारी संसाधनों को भारी नुकसान हो सकता है।

 

फिलहाल बांदा जिले में अवैध खनन को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और लोगों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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