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श्रावस्ती में किसानों से महंगे दाम पर यूरिया बेचने का आरोप, निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली की शिकायत

खरीफ सीजन में किसानों की बढ़ी परेशानी

श्रावस्ती। खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की बढ़ती मांग के बीच श्रावस्ती जिले से किसानों की परेशानी बढ़ाने वाली शिकायत सामने आई है। सिरसिया विकास खंड क्षेत्र के चरगहियां मोड़ स्थित एक खाद-बीज भंडार पर किसानों ने निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर यूरिया बेचने का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में अधिक कीमत चुकाकर खाद खरीदनी पड़ रही है।

निर्धारित मूल्य से अधिक दाम लेने का आरोप

किसानों के अनुसार, चरगहियां मोड़ स्थित खान खाद बीज भंडार पर यूरिया की एक बोरी करीब 330 रुपये में बेची जा रही है। किसानों का आरोप है कि यह मूल्य निर्धारित दर से अधिक है, जिससे उनकी खेती की लागत बढ़ रही है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित विक्रेता या उर्वरक विभाग की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

किसानों ने जांच की मांग उठाई

स्थानीय किसानों का कहना है कि खरीफ की बुवाई के समय यूरिया की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। ऐसे समय में यदि निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूली जाती है, तो इसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।

किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि एवं उर्वरक विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

इस मामले के सामने आने के बाद उर्वरक वितरण व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय-समय पर दुकानों का निरीक्षण किया जाए और मूल्य सूची की जांच हो, तो इस प्रकार की शिकायतों पर रोक लगाई जा सकती है।

कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि उर्वरकों की उपलब्धता और निर्धारित मूल्य पर बिक्री सुनिश्चित करना किसानों के हित में आवश्यक है।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

फिलहाल इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से जांच या कार्रवाई की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यदि किसानों की शिकायत मिलती है, तो संबंधित अधिकारी जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं।

निष्कर्ष

श्रावस्ती में यूरिया की अधिक कीमत पर बिक्री के आरोपों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि निर्धारित मूल्य से अधिक भुगतान करना उनकी मजबूरी बन गया है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और उर्वरक विभाग पर हैं कि शिकायतों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि अनियमितता पाई जाती है तो आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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