रिपोर्ट – कबीर
मुजफ्फरनगर। स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदेशभर में चल रहे स्कूल सेफ्टी ऑडिट अभियान के तहत मुजफ्फरनगर में भी विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था परखी जा रही है। आठ सितंबर से शुरू हुए अभियान में जिले के 289 स्कूलों का निरीक्षण किया जा रहा है। इनमें 247 कंपोजिट और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का ऑडिट पूरा हो चुका है, जबकि 42 राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों की जांच 28 अक्टूबर तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान में स्कूल भवनों की मजबूती से लेकर अग्निशमन उपकरणों की कार्यक्षमता तक की जांच की जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
नौ टीमें कर रहीं सुरक्षा मानकों की जांच
मुख्य विकास अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक की देखरेख में नौ विशेष टीमें अभियान को अंजाम दे रही हैं। इन टीमों में क्षेत्रीय लेखा परीक्षक, संरचनात्मक अभियंता और अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हैं। टीमों को विद्यालयों में सुरक्षा से जुड़ी खामियों की पहचान करने, भवनों की स्थिति परखने और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जांच को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है। मोबाइल ऐप के जरिए निरीक्षण, जीपीएस लोकेशन, जियो-टैगिंग और फोटो-वीडियो के माध्यम से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। ऑनलाइन डैशबोर्ड पर अधिकारी वास्तविक समय में निरीक्षण की प्रगति देख रहे हैं। इससे जांच की निगरानी के साथ ही रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को भी व्यवस्थित किया जा रहा है।
कस्तूरबा विद्यालय में पहुंचकर अधिकारियों ने परखी व्यवस्था
शुक्रवार को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में चल रहे सेफ्टी ऑडिट का डीपीएम गुलजार और जिला आईटी/एमआईएस शीजा खानम ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। क्षेत्रीय लेखा परीक्षक विनय शर्मा, संरचनात्मक अभियंता विशाल भारद्वाज और अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञ जहीर हुसैन ने विद्यालय परिसर का निरीक्षण कर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की।
टीम ने भवन की स्थिति, सुरक्षा इंतजामों और अग्निशमन उपकरणों की कार्यक्षमता का परीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मिली खामियों को चिह्नित करने के साथ विद्यालय के कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया गया। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में स्कूल स्टाफ को तत्काल और उचित कदम उठाने के लिए तैयार करना है, ताकि छात्राओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा सके।
ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर तय होगी आगे की रणनीति
जिले में चल रहा यह अभियान केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूलों में मौजूद सुरक्षा संबंधी कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर तैयार होने वाली रिपोर्ट से विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
फिलहाल 247 विद्यालयों का ऑडिट पूरा हो चुका है और शेष 42 राजकीय विद्यालयों की जांच 28 अक्टूबर तक पूरी की जानी है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि निरीक्षण में सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं, क्योंकि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए केवल मानकों की जांच ही नहीं, बल्कि उनका प्रभावी पालन भी जरूरी है।
